कोविड महामारी के कारण इस साल भी कांवड़ यात्रा नहीं होगी। कोरोना की तीसरी लहर और वायरस के नए वेरिएंट डेल्टा प्लस को देखते हुए कांवड़ यात्रा न करने का फैसला लिया है। हर साल कांवड़ यात्रा में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के लाखों शिव भक्त गंगा जल लाने के लिए हरिद्वार आते थे।
पिछले साल 15 मार्च को प्रदेश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला मिला था। संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार ने कांवड़ यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया था। साथ ही सरकार ने यह भी फैसला लिया था कि शिव भक्तों को गंगा जल उन्हीं के राज्यों में उपलब्ध कराया जाएगा।
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इसके लिए सरकार ने पड़ोसी राज्यों के साथ बातचीत करने के बाद कांवड़ यात्रा न करने का निर्णय लिया था। कोरोना की तीसरी लहर और देश के कई राज्यों में डेल्टा प्लस वेरिएंट तेजी से फैलने के चलते इस बार भी कांवड़ यात्रा नहीं होगी।
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कांवड़ यात्रा में कुंभ की तरह श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है
कांवड़ यात्रा में दूसरे राज्यों से लाखों की संख्या में कांवड़ियां हर की पैड़ी आते हैं। जहां से गंगाजल लेकर शिवरात्रि पर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर का कहना है कि कांवड़ यात्रा को स्थगित करने का सरकार की ओर से निर्णय हो चुका है। अभी विभाग की ओर से इसका आदेश नहीं हुआ है।
कारीगरों को भी मिलता है काम
कांवड़ यात्रा से होटल, धर्मशालाओं, दुकानदारों के अलावा कांवड़ बनाने वालों को राहत मिलती है। पंतद्धीप पार्किंग, रोडीबेलवाला और अपर रोड पर कांवड़ बनाई जाती है। कारीगरों की आजीविका कांवड़ बनाने पर ही निर्भर है।