हाईकोर्ट ने कार्मिक सचिव को निर्देश दिए हैं कि पीसीएस परीक्षा के अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देने और फॉर्म भरने की अंतिम तिथि बढ़ाने को लेकर निर्णय लें। हाईकोर्ट के इन निर्देश से पीसीएस अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। आशुतोष भट्ट, अमित बाटला, गुलफाम, हरेंद्र रावत और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनकी आयु 45 वर्ष हो चुकी है, जबकि प्रदेश में पीसीएस परीक्षा के लिए आयु सीमा 42 साल है। याचिका में कहा गया कि 10 अगस्त 2021 को परीक्षा का विज्ञापन जारी किया गया था, जिसकी परीक्षा 10 अक्तूबर को होनी है।
याचिका में कहा गया कि राज्य बनने के बाद पीसीएस की परीक्षा छह बार हुई है और 2016 के बाद कोई परीक्षा हुई ही नहीं है। इस कारण वे इस परीक्षा से वंचित होते आए हैं। याचिका में कहा गया कि 2014 में सी सेट पैटर्न लागू किया गया था। इस नए पैटर्न के चलते वे क्वालीफाई नहीं कर पाए थे और यह पैटर्न आईएएस की परीक्षा में 2011 में लागू किया गया था। इसके तहत जो अभ्यर्थी इस परीक्षा को क्लीयर नहीं कर पाए, उन्हें केंद्र सरकार ने 2012 में दो अतिरिक्त अवसर दिए थे और ओवर ऐज अभ्यर्थियों को यूपी सरकार ने भी यह अवसर दिया था लेकिन उत्तराखंड में तब से यह परीक्षा हुई ही नहीं, जिसका लाभ उनको नहीं मिल सका।
हाईकोर्ट ने पिछड़े वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं दिए जाने के मामले में राज्य सरकार को तीन सितंबर तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
दलित मुस्लिम पिछड़ा वर्ग एकता संगठन समिति रुड़की ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने वर्ष 2017 से मुस्लिम दलित पिछड़े वर्ग को मिलने वाली छात्रवृत्ति बंद कर दी है। यह छात्रवृत्ति केंद्र सरकार के आदेश के बाद भी नहीं दी जा रही है।
इसके चलते पिछड़ा वर्ग से जुड़े छात्र आईआईटी सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं। याचिकाकर्ता समिति का कहना था कि पिछड़े वर्ग को छात्रवृत्ति दिलाई जाए ताकि छात्र शुल्क जमा करने के साथ ही पठन-पाठन कर सकें।