नम्रता कंडवाल ने बताया कि वह नेचुरल बिल्डिंग मैटेरियल पर काम करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने बिल्डिंग मैटेरियल में भांग की लकड़ी का इस्तेमाल करने की सोची। इसके अलावा उसके फाइबर पर भी काम कर रहे हैं। जब वह शोध कर रही थीं, तब पता चला कि जो बिल्डिंग मैटेरियल हमनें विकसित किया है, वह एलोरा की गुफाओं में पंद्रह सौ साल पहले भी इस्तेमाल किया गया है। विदेशों में भी इस पर काम हो रहा है। उत्तराखंड में इसे लेकर पॉलिसी भी है। इसलिए हमने यहां आने के लिए सोचा।
जलवायु के अनुसार बनेंगे मकान
नम्रता के अनुसार पुराने मकान क्लाइमेट के अनुसार होते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब मकान गर्मियों में बहुत गरम और सर्दियों में बहुत ठंडे होते हैं, लेकिन हमारे द्वारा तैयार सामग्री से बनाए जाने वाले मकानों में यह दिक्कत नहीं होगी। इस सामग्री के उपयोग से मकान गर्मियों में ठंडक देंगे और सर्दियों में ठंडे नहीं रहेंगे। भूकंप के लिहाज से भी यह सामग्री सबसे बेहतर विकल्प है।
प्रधानमंत्री ने भी सराहा
ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज में नम्रता और उनके साथियों के प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री ने भी सराहा। बिल्डिंग मैटेरियल टेक्नोलॉजी पर काम कर 80 प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया था। जिसमें नम्रता और उनकी टीम शीर्ष पांच में शामिल रहे। जनवरी में ही प्रधानमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। इसके बाद अब वह मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग टेक्नोलॉजी के साथ भी काम कर रहे हैं।