प्रदेश के मुख्यमंत्री के बच्चों के मामा और मंत्री के बुआ बन जाने के बाद भी कोविड में अनाथ हुए 1706 बच्चों के स्वास्थ्य, संपत्ति की देखभाल आदि के संबंध में विभाग शासनादेश जारी नहीं कर रहे हैं। इससे इन बच्चों को योजना शुरू होने के बाद भी उसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने मामले में नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। कहा है कि बेसहारा बच्चों को अधिक से अधिक विभागों का सहयोग मिले, इसके लिए इन विभागों से शीघ्र शासनादेश जारी करवाया जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीती एक अगस्त को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का शुभारंभ किया था। इसी दौरान उन्होंने खुद को बच्चों का मामा और मंत्री आर्य ने खुद को बुआ बताया था। योजना के श्रीगणेश के बाद से इन बच्चों के खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सरकार की ओर से हर महीने तीन हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, लेकिन बच्चों को मुफ्त खाद्यान, स्वास्थ्य चिकित्सा आदि योजनाओं के संबंध में शासनादेेश न होने से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने इस पर नाराजगी जताई है। मंत्री ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा कि कैबिनेट की बैठक में इस संबंध में सभी विभागों को निर्णय भेज दिए गए थे, लेकिन विभागों की ओर से अब तक कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बच्चों के साथ खिलवाड़ है। वहीं मंत्री ने कहा कि पूर्व में हुई बैठक में यह सहमति बनी थी कि इससे संबंधित समस्त कार्यवाही सात दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी, लेकिन अब तक इस मसले पर कार्यवाही नहीं हुई।
मुख्य सचिव एवं विभागीय अधिकारियों की 9 अगस्त को हुई बैठक में कहा गया था कि योजना से संबंधित सभी विभागों के शासनादेश जारी किए जाएं, लेकिन अब तक जीओ नहीं हुआ। मैं कोविड से अनाथ हुए बच्चों की बुआ हूं, मेरा कर्तव्य बनता है कि अधिकारियों को इस संबंध में बार-बार आगाह किया जाए, ताकि बच्चों को योजना का पूरा लाभ मिल सके।
-रेखा आर्य, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री