वहीं फायर वॉचर कृष्ण कुमार, पीआरडी जवान कुंदन सिंह, वाहन चालक भवगत सिंह और वन श्रमिक कैलाश भट्ट बुरी तरह से झुलस गए थे। उन्हें उपचार के लिए दिल्ली एम्स ले जाया गया था। सातवें दिन फायर वॉचर कृष्ण कुमार जीवन की जंग हार गया और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
घर का इकलौता चिराग बुझा
कृष्ण कुमार की मौत से घर का इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया है। बेटे की मौत की खबर सुनकर मां बेसुध है और दो बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने बेटे को अपनी आंखों के सामने मौत के मुंह में समाता देख पिता के आंसू सूख चुके हैं।