रमावती के पति दिहाड़ी मजदूरी कर घर चलाते थे, लेकिन पति के साथ ऐसी दुर्घटना घटी की वह अब चलने में असमर्थ हैं। दिहाड़ी मजदूरी से पति जो कमाता था उसी में रमावती खुशी से घर चलाती थी, लेकिन किस्मत ने ऐसा दिन दिखाया कि रमावती को मजबूरन लोगों के सामने हाथ फैलाने पड़े। पिछले दस साल से रमावती के पति बिस्तर पर हैं। बेटी की शादी कराई, लेकिन रमावती के जीवन से सम्मान से रोटी खाने का नसीब छिन गया। हर दिन बस इसी उम्मीद के साथ रमावती निकलती है कि पति की दवा का इंतजाम हो जाए। रमा ने बताया कि पति ही एक सहारा है। कहती है कि मुझे इस तरह भीख मांगता देख पति का दिल भी दुखता है, लेकिन कोई रास्ता भी नहीं है।