जिम काॅर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व एक और बाघ को जल्द ही लाया जाएगा। राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों को लाया जा सके इसके लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। पहले चरण में एक बाघ और एक बाघिन को लाया जा चुका है।
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के निर्देश पर पांच बाघ-बाघिन को लाया जाना है। देश में कोरोना संकट और फिर मानसून के दौरान अधिक बारिश होने की वजह से बाघों को चिह्नित करने व उन्हें राजाजी टाइगर रिजर्व लाए जाने की योजना पर रोक लग गई थी। कोरोना को लेकर स्थितियां सामान्य होने के साथ ही मानसून सीजन समाप्त होने के बाद एक बार फिर बाघों को लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक डीके सिंह ने बताया कि अभी तीन बाघों को लाना बाकी है। ऐसे में अब एक और बाघ को लाने की तैयारी है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर बाघ को राजाजी टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। टाइगर रिजर्व में फिलहाल 44 बाघ है जिसमें से 42 बाघ पूर्वी क्षेत्र में है। पश्चिमी क्षेत्र में सिर्फ दो बाघ हैं। ऐसे में टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने को लेकर वहां पांच बाघ लाए जाने हैं।
लैंसडौन में ही रहेगा केटीआर का कार्यालय: डॉ. हरक सिंह
वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने केटीआर के कार्यालय को लैंसडौन कोटद्वार शिफ्ट करने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा कि लैंसडौन स्थित कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग (केटीआर) का कार्यालय लैंसडौन में ही रहेगा। कार्बेट क्षेत्र की कुछ खास विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए फिलहाल कुछ दिनों के लिए अधिकारी व कर्मचारी कोटद्वार स्थित कैंप कार्यालय से कार्य कर रहे हैं। इन योजनाओं के नवंबर में पूरा होते ही पूर्व की भांति कार्यालय लैंसडौन से ही कार्य करेगा।
रामलीला के उद्घाटन पर लैंसडौन पहुंचे वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत से इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों ने मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। वन मंत्री ने लोगों को आश्वासन दिया कि कार्यालय को कोटद्वार शिफ्ट नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केटीआर का कार्यालय लैंसडौन में ही है और भविष्य में भी कार्यालय लैंसडौन में ही रहेगा। उन्होंने कहा कि कार्यालय कोटद्वार स्थानांतरित करने के बारे में फैली भ्रांतियां गलत हैं।