वर्ष 2006 में जबसे वैज्ञानिकों ने प्लूटो की ग्रह के रूप में मान्यता समाप्त की, तब से नेपच्यून सौर मंडल का सबसे दूर स्थित ग्रह माना जाता है। इसकी दूरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके प्रकाश को पृथ्वी तक आने में चार घंटे का समय लगता है। सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक आठ मिनट में पहुंचता है। नेपच्यून को सबसे पहले 1613 में गैलीलियो ने देखा था, लेकिन उन्हें लगा कि यह कोई स्टार है। दोबारा उन्हें यह नजर नहीं आया। नग्न आंखों से दिखाई न देने के कारण लंबे समय तक इसकी खोज नहीं हो सकी। 1846 में वेरियर और जोहान गेले ने भी इसे देखकर नहीं बल्कि गणितीय मॉडल के आधार पर इसकी खोज की।
16 और 17 को चांद संग शनि का खूबसूरत नजारा
14 सितंबर को नेपच्यून के पृथ्वी के सर्वाधिक निकट आने के बाद 16 सितंबर को चांद और शनि और फिर 17 सितंबर को चांद और बृहस्पति आपस में बहुत निकट आकर दर्शनीय नजारा प्रस्तुत करेंगे।