सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो रही है। वर्तमान में सिर्फ 43 प्रतिशत विशेषज्ञ डॉक्टर ही कार्यरत हैं। टिहरी, चमोली और पौड़ी जिले में स्वीकृत पदों की तुलना में सबसे कम डॉक्टर हैं। सूचना का अधिकार के तहत स्वास्थ्य विभाग से मिली सूचना के आधार पर सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पर अध्ययन रिपोर्ट जारी की है। कोविड महामारी के बीच कुल 15 अलग-अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों की श्रेणी में 43 प्रतिशत डॉक्टरों की सेवाएं ही उपलब्ध हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 30 अप्रैल 2021 तक प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के कुल 1147 स्वीकृत पदों में से मात्र 493 ही कार्यरत हैं। बाकी 654 पद खाली हैं। देहरादून जिले में सबसे ज्यादा विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं। यहां 92 प्रतिशत विशेषज्ञ डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। जबकि डॉक्टरों की उपलब्धता के मामले में 63 प्रतिशत के साथ रुद्रप्रयाग दूसरे स्थान पर है। वहीं, टिहरी में 13, चमोली में 27 और पौड़ी जिले में स्वीकृत पदों की तुलना में 28 प्रतिशत विशेषज्ञ डॉक्टरों कार्यरत है। फाउंडेशन ने स्टेट ऑफ स्पेशलिस्ट डॉक्टर इन उत्तराखंड 2021 रिपोर्ट में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पर फोकस किया है।
राज्य में फोरेंसिक स्पेशलिस्ट के कुल स्वीकृत 25 पदों में से केवल एक फोरेंसिक स्पेशलिस्ट है। चर्म रोग के 38 और साइक्रेटिस्ट के 28 पद स्वीकृत हैं। जबकि इन दोनों पदों पर केवल चार-चार स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की ही नियुक्ति की गई हैं। इस समय प्रदेश कोरोना महामारी का सामना कर रहा है। तीसरी लहर से निपटने की चुनौती सामने है। उत्तराखंड में जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मात्र 14 प्रतिशत और बाल रोग विशेषज्ञ केवल 41 प्रतिशत हैं। जबकि स्त्री रोग विशेषज्ञ केवल 36 प्रतिशत हैं।
एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बेहद चिंताजनक है। राज्य सरकार से आग्रह है कि जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों पर नियुक्तियां करने के उपाय शुरू करे। स्वास्थ्य सुविधाओं की उचित व्यवस्था न होने से कोविड महामारी में किये जाने वाले प्रयास बेअसर साबित हो सकते हैं। इन स्थितियों का ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों पर अधिक असर पड़ता है, जिसे अनदेखा किया जाता है।
एसडीसी फाउंडेशन की अध्ययन टीम के सदस्य और शोधकर्ता विदुष पांडे कहना है कि राज्य के जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं। एसडीसी फाउंडेशन के रिसर्च एंड कम्युनिकेशंस हेड ऋषभ श्रीवास्तव ने कहा कि फाउंडेशन ने पहले राज्य में पूर्णकालिक स्वास्थ्य मंत्री के लिए अभियान चलाया था। नए सीएम पुष्कर सिंह धामी की नियुक्ति के बाद राज्य को पूर्णकालिक स्वास्थ्य मंत्री मिल चुके हैं। राज्य में स्त्री रोग विशेषज्ञों की केवल 36 प्रतिशत उपलब्धता दर्शाती है कि हालात बेहद खराब हैं और इसका सीधा प्रभाव महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
विधायकों ने भी उठाई विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांग
स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत के साथ बैठक में चमोली, रुद्रप्रयाग व पौड़ी जिले के विधायकों ने जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती का मुद्दा उठाया था। इससे पहले 2018 में नीति आयोग की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के मामले में भी उत्तराखंड को तीन सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में रखा गया था।