कार्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग में अवैध निर्माण और पेड़ों के पातन मामले की जांच अब विजिलेंस करेगी। शुक्रवार को शासन ने इस आशय के आदेश कर दिए हैं। अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री आनंद वर्द्धन ने इसकी पुष्टि की है।
बता दें कि कालागढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन पाखरो में टाइगर सफारी के लिए स्वीकृति से ज्यादा पेड़ काटे जाने और पाखरो से कालागढ़ तक अवैध निर्माण का मामला इन दिनों सुर्खियों छाया हुआ है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने अपनी स्थलीय जांच रिपोर्ट में इन शिकायतों को सही पाते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की है। यह प्रकरण दिल्ली हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। जबकि नैनीताल हाईकोर्ट ने भी इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।
इस मामले में मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी और अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) बीके गांगटे पहले ही जांच से इनकार कर चुके हैं। शासन के निर्देश पर पीसीसीएफ ने चतुर्वेदी को और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने गांगटे को जांच सौंपी थी। लेकिन दोनों ने ही अधिकारियों ने अलग-अलग कारण बताते हुए जांच करने से इनकार कर दिया। अब शासन ने इस मामले में विजिलेंस जांच कराने का निर्णय लिया है।