ट्रस्ट ने दी सफाई
श्री केदारनाथ धाम दिल्ली ट्रस्ट की ओर से जारी एक प्रेस बयान में सूचित किया गया कि ट्रस्ट जिस केदारनाथ मंदिर का निर्माण कर रहा है, उस मंदिर का उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम से कोई संबंध नहीं है। केदारनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ट्रस्ट के मुताबिक, दिल्ली में खाटू श्याम, माता वैष्णो देवी और बदरीनाथ जैसे कई मंदिर बनाए गए हैं। उसी तरह ट्रस्ट श्री केदारनाथ मंदिर का निर्माण कर रहा है।
केदारनाथ धाम उत्तराखंड के उच्च हिमालय में स्थित थे। धाम के अंदर में जो मंदिर हैं, वे दूसरे स्थानों पर भी होते हैं। मंसा देवी व चंडीदेवी के मंदिर भी बहुत से राज्यों व स्थानों पर बनाए गए हैं। मंदिर को मंदिर के रूप में देखना चाहिए। धाम का आशीर्वाद धाम के दर्शन से ही मिलता है।
- महेंद्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
दिल्ली में केदारनाथ मंदिर का शिलान्यास सनातन धर्म का अपमान : कांग्रेस
दिल्ली में केदारनाथ धाम के प्रतीकात्मक मंदिर का शिलान्यास का कांग्रेस ने विरोध किया। कांग्रेस ने इसे सनातन धर्म का अपमान करार दिया। कांग्रेस मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी व प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने कहा कि केदारनाथ धाम के प्रतीकात्मक मंदिर का शिलान्यास करना सनातन और वैदिक परंपरा का अपमान है।
शिव पुराण के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग में भगवान केदारनाथ का अपना एक स्थान है यदि अब ज्योतिर्लिंग का भी प्रतीक बनाया जाएगा तो यह हिंदू सनातन धर्म के लिए न सिर्फ चिंताजनक है बल्कि बहुत ही घातक है। आखिर भाजपा सरकारें सनातन की अपनी मनमानी व्याख्या क्यों कर रही हैं।
सदियों से केदारनाथ धाम की अपनी महिमा है और उसका अपना इतिहास है। भाजपा उस इतिहास को अपने हिसाब से लिखना चाहती है। इससे करोड़ों सनातन के अनुयायियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा, प्रदेश सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। अन्यथा उत्तराखंड को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।