उत्तराखंड सचिवालय संघ के प्रतिनिधिमंडल के साथ सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक की। संघ ने 14 सूत्री मांगों के साथ ही सचिवालय की समस्याओं को लेकर 22 अन्य सुझाव भी उनके सामने रखे। मुख्यमंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
संघ ने तत्कालीन वित्त मंत्री प्रकाश पंत के साथ सचिवालय संघ के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुए लिखित समझौते की याद दिलाते हुए सभी कार्मिकों की कॉमन मांगों-एमएसीपी के स्थान पर एसीपी की पूर्व व्यवस्था लागू करने, शिथिलीकरण नियमावली, 2010 को पुन: प्रभावी करने, पुरानी पेंशन की बहाली के लिए राज्य सरकार का संकल्प पत्र केंद्र सरकार को भेजने, पति/पत्नी के सेवारत रहने पर दोनों कार्मिकों को मकान किराया भत्ता अनुमन्य करने संबंधी मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। उन्होंने गोल्डन कार्ड की खामियों को दुरुस्त कर सीजीएचएस की दरों पर योजना को संचालित करने की भी मांग की।
इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा घोषित 11 प्रतिशत महंगाई भत्ते की अनुमन्यता एरियर सहित तत्काल देने की मांग को भी प्रमुखता से रखा गया। इसके साथ ही संघ पदाधिकारियों ने बताया कि किस प्रकार सचिवालय कार्मिक टिनशेड में गर्मी में तपकर बैठने को मजबूर हैं। बैठने के लिए पर्याप्त स्थान, फर्नीचर, स्टेशनरी एवं रोजमर्रा के आवश्यक सामग्री का अभाव है। कार्मिकों के बच्चों के लिए क्रेच सेंटर की व्यवस्था चरमराई हुई है।
संघ की ओर से यह भी कहा गया कि सचिवालय में आईएएस सेवा को छोड़कर अन्य सेवाओं जैसे भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय वन सेवा, प्रांतीय सिविल सेवा, वित्त सेवा आदि को सचिवालय में पद चिन्हित करते हुए धारित वेतनमान के अनुरूप ही सचिवालय में पदनाम दिया जाए। ऐसे कम वेतनमान धारण करने वाले अधिकारियों को सीधे अपर सचिव न बनाया जाए। उन्हें उनसे संबंधित सेवा विभाग का ही कार्य दिया जाए।
संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी मसलों को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा है कि सचिवालय कार्मिकों से जुड़ा जो भी मामला होगा, उसमें कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अपर प्रमुख सचिव अभिनव कुमार, सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली, संयुक्त सचिव मुख्यमंत्री संजय सिंह टोलिया, संघ के कार्यकारिणी उपाध्यक्ष सुनील लखेड़ा, महासचिव विमल जोशी, जेपी मैखुरी, देवेंद्र रावत, अनिल प्रकाश उनियाल, लालमणि जोशी, किशन असवाल, उमेश कुमार, संदीप बिष्ट आदि मौजूद रहे।