मुकदमे में अगली तारीखें लगीं। इसके बाद इन सभी लोगों ने स्वयं उपस्थित न होने के लिए अपने-अपने अधिवक्ताओं को पैरवी के लिए नियुक्त किया। इसके लिए इनमें से दीशशिखा, आरटीओ सुनील शर्मा, सुष्मा गौड़, शरद रघुवंशी और हेमंत पांडे ने आशीष नाथ के पक्ष में पॉवर ऑफ अटॉर्नी (शपथपत्र) कोर्ट में प्रस्तुत कर दिया। ये शपथपत्र नोटरी अधिवक्ता राजेंद्र सिंह नेगी ने सत्यापित किए थे। इसके लिए पुनीत अग्रवाल ने अधिवक्ता राजेंद्र सिंह नेगी को एक कानूनी नोटिस भेजकर इन शपथपत्र की सच्चाई जानी। गत छह मार्च को आए जवाब में पता चला कि नोटरी अधिवक्ता नेगी ने ऐसे कोई शपथपत्र सत्यापित नहीं किए हैं।
इस तरह इन सभी की ओर से प्रस्तुत किए गए ये शपथपत्र फर्जी पाए गए। एसओ रायपुर कुंदन राम ने बताया कि इस संबंध में पुनीत अग्रवाल ने एसएसपी कार्यालय को शिकायत की थी। इसकी जांच के बाद अब आरटीओ समेत कॉलोनी के पांच निवासियों और आशीष नाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
बार में पंजीकृत भी नहीं है अधिवक्ता
जांच में पता चला है कि जिस अधिवक्ता आशीष नाथ के पक्ष में शपथपत्र दिया गया है वह बार एसोसिएशन देहरादून में पंजीकृत ही नहीं है। ऐसे में जांच का विषय अब यह भी है कि इन आरोपियों ने इस कथित अधिवक्ता को अधिकार दिए भी थे या नहीं। यदि ऐसा नहीं है तो शपथपत्र सभी के नाम के कैसे बना लिए गए। पुलिस ने इस मामले में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।