कैबिनटे के प्रमुख फैसले
- हरिद्वार में पंचायतों में तैनात प्रशासक का कार्यकाल छह महीने बढ़ेगा, सरकार लाएगी पंचायती राज संशोधन विधेयक 2021।
- सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के 50 करोड़ रुपये निवेश तक प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी। अभी तक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित को 10 करोड़ के निवेश तक की मंजूरी का अधिकार है।
- काशीपुर में 2500 करोड़ के निवेश से बनेगा इलेक्ट्रानिक पार्क, पार्क बनाने के लिए उद्योग विभाग की 133.8 एकड़ भूमि सिडकुल को दी जाएगी।
- परिवहन निगम के लिए अधीनस्थ चयन आयोग से चयनित 24 कर्मचारियों को अन्य विभागों में समायोजित किया जाएगा।
- कार्बेट पार्क कोविडकाल में बुकिंग रद करने पर रिफंड मिलेगा, रिफंड नीति को मंजूरी।
- देहरादून-ऊधमसिंह नगर में वाहन फिटनेस टेस्टिंग सेंटर प्राइवेट सेक्टर में दिया जाएगा।
- नैनीताल में निजी क्षेत्र में आम्रपाली विवि खोलने को मंजूरी।
- 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2021 के बीच सेवानिवृत कार्मिकों के महंगाई भत्ता को ग्रेच्यूटी एवं अवकाश नकदीकरण का भुगतान व 28 प्रतिशत महंगाई भत्ते को देने का निर्णय लिया गया।
- परफार्मेंस गारंटी कम सिक्योरिटी डिपाजिट की दरों में कमी करने का निर्णय।
- विदेशी मदिरा के बॉटलिंग प्लांट तथा बियर उत्पादन वैट प्रति पूर्ति की अधिकतम सीमा का निर्धारण।
- उत्तराखंड पशुपालन विभाग (प्रयोगशाला सहायक) सेवा नियमावली 2021 को मंजूरी।
- राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से उपलब्ध ऋण की राशि पर 256 दिनों के ब्याज को सरकार वहन करेगी।
- सकल घरेलू उत्पाद के समान सकल पर्यावरणीय उत्पाद का आंकलन करने का निर्णय।
- परिवहन विभाग में देहरादून, ऊधमसिंह नगर में आटोमेटिक वाहन फिटनेस टेस्टिंग सेंटर को निजी क्षेत्र से संचालित करने का निर्णय।
- उत्तराखंड जमींदारी विनाश भू-व्यवस्था नियमावली में संशोधन का निर्णय।
- राज्य सरकार योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए एएनआई को अधिकृत करने की मंजूरी।
कैबिनेट में विधेयक वापसी पर तीर्थ पुरोहितों ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट के उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक 2019 को वापस लेने की घोषणा पर सहमति दिए जाने का चार धामों के तीर्थपुरोहितों एवं हकहकूकधारियों ने स्वागत किया है। चार धामों के तीर्थ पुरोहितों व पुजारियों ने कहा कि सरकार का निर्णय ऐतिहासिक और साहसिक है।
चार धाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत के प्रवक्ता डॉ बृजेश सती ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा 30 नवंबर को चार धाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक को वापस लेने की घोषणा की गई थी और इसी क्रम में आज उनकी कैबिनेट ने इस विधेयक को वापस लेने पर मोहर लगाई है। इसके लिए चारों धामों के पुरोहित, पुजारी, रावल एवं पुजारी धामी कैबिनेट का धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। डा. सती ने कहा कि वह सरकार से मांग करते हैं जिस तरह से 10 दिसंबर 2019 को यह एक्ट राज्य विधानसभा से पारित हुआ था। उसी दिन यह एक्ट वापस लेकर उस दिन को ऐतिहासिक बनाया जाए।
कैबिनेट के फैसले के बाद भी गेस्ट टीचरों की सेवाएं हो रही समाप्त
प्रदेश में गेस्ट टीचरों के पदों को खाली न माने जाने के कैबिनेट के फैसले के बाद भी कुछ गेस्ट टीचरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इससे गेस्ट टीचरों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकार ने यदि उनके सुरक्षित भविष्य के लिए कोई ठोस कदम न उठाया तो संगठन इसके विरोध में आंदोलन को बाध्य होगा।
अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री दौलत जगुड़ी के मुताबिक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहली कैबिनेट में गेस्ट टीचरों के हित में तीन बड़े फैसले लिए गए थे। कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया गया कि गेस्ट टीचरों का मानदेय 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जाएगा। उनके पदों को खाली नहीं माना जाएगा। इसके अलावा उनकी गृह जिलों में तैनाती की जाएगी, लेकिन अब तक तीन में से मात्र एक फैसले पर अमल हुआ है।
गेस्ट टीचरों का मानदेय 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया गया। जबकि अन्य दो प्रस्तावों पर अमल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि गेस्ट टीचरों के पद खाली न माने जाने के कैबिनेट के फैसले के बावजूद उत्तरकाशी और पौड़ी में कुछ गेस्ट टीचरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। नियमित नियुक्ति के शिक्षक आने से उनकी सेवाएं समाप्त की गई।
अतिथि शिक्षक संगठन के पूर्व अध्यक्ष राजेश धामी ने कहा कि वर्तमान में एलटी पदों पर वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति हो रही हैं। जिससे गेस्ट टीचर प्रभावित हो रहे हैं। पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लॉक में अतिथि शिक्षक की जगह नियमित शिक्षक की तैनाती कर दी गई है। इसके अलावा उत्तरकाशी के नौगांव और चमोली जिले में भी गेस्ट टीचरों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं।