एक अस्पताल से दूसरे या हायर सेंटर रेफर होने वाले मरीज के लिए सरकारी अस्पतालों के बीच समन्वय होना जरूरी है। लेकिन ज्यादातर सरकारी अस्पताल मरीज को रेफर करने से पहले हायर सेंटर में मरीज के लिए जरूरी संसाधनों का पता नहीं करते।
जिसके चलते रेफर होकर जाने वाले मरीज और परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सीएमएस डा.एसडी सकलानी का कहना है कि जब किसी मरीज के परिजन मांग करते हैं तो हायर सेंटर में मरीज के लिए आवश्यक इलाज के बारे में पता किया जाता है।
वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने पर एम्स प्रबंधन ने भी उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया। बाद में परिचित उसे चड़ीगढ़ ले गए, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उसने दम तोड़ दिया। कमलेश के साथ गए दुकान स्वामी अशोक शर्मा का कहना है कि कमलेश को समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
मेरे पास एंबुलेंस के लिए कोई नहीं आया। वे फ्री के चक्कर में 108 एंबुलेंस सेवा से गए होंगे। लंबे रास्ते पर तीन जगह एंबुलेंस बदल जाना तो 108 सेवा का नियम है। लेकिन कोई मांग करता है तो 108 सेवा भी गंभीर मरीज को सीधे हायर सेंटर लेकर जाती है।
-डा. एसडी सकलानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक उत्तरकाशी