प्रदेश के राजकीय कर्मचारियों और पेंशनरों को कैशलेस इलाज के लिए चलाई गई राज्य स्वास्थ्य योजना में अब पेंशनरों से प्रतिमाह अंशदान की कटौती नहीं की जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश पर शासन ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से हर महीने अंशदान की कटौती पर रोक लगा दी है। योजना में कैशलेस इलाज की सुविधा लेने या न लेने के लिए पेंशनरों से लिखित में सहमति ली जाएगी।
राज्य आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश सरकार ने एक जनवरी 2021 से प्रदेश के राजकीय सेवा में कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनरों को असीमित खर्च पर कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए राज्य स्वास्थ्य स्कीम शुरू की थी। जिसमें प्रदेश के लगभग तीन लाख कर्मचारियों व पेंशनरों को शामिल किया गया। योजना के शुरुआत में पेंशनरों का अंशदान 200 रुपये प्रतिमाह तय किया गया था। जिसे बाद में बदल कर सेवारत कर्मचारियों के समान ही श्रेणी के हिसाब से पेंशनरों का अंशदान तय किया गया। जनवरी से पेंशनरों की पेंशन से अंशदान की कटौती शुरू की गई।
पेंशनरों की पेंशन से अंशदान की कटौती करने पर हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की गई। 15 दिसंबर 2021 को पारित हाईकोर्ट के आदेश पर शासन ने पेंशनरों से प्रतिमाह अंशदान कटौती पर रोक लगा दी है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में राज्य स्वास्थ्य योजना में पेंशनरों से अंशदान कटौती को स्थगित किया गया है। योजना में कैशलेस इलाज के लिए पेंशनरों से सहमति ली जाएगी। जो पेंशनर योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हीं से अंशदान लिया जाएगा। जो पेंशनर योजना में शामिल नहीं होना चाहते हैं, उनसे अंशदान नहीं लिया जाएगा।
राज्य स्वास्थ्य स्कीम में अब तक बने 4.50 लाख गोल्डन कार्ड
कैशलेस इलाज के लिए अब तक 4.50 लाख कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। प्रदेश में करीब तीन लाख कर्मचारी व पेंशनर हैं। अब तक कर्मचारियों व पेंशनरों के इलाज पर योजना में 25.86 करोड़ की राशि खर्च की गई है।
सेवारत और पेंशनरों से प्रति माह अंशदान
श्रेणी - अंशदान प्रतिमाह रुपये में
वेतन स्तर 1 से 5 - 250
वेतन स्तर 6 - 450
वेतन स्तर 7 से 11 - 650
वेतन स्तर 12 से अधिक - 1000