सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। हालांकि मौसम खराब होने के कारण दोपहर तक सेना का कोई भी दल मौके पर नहीं पहुंच पाया था। दोपहर बाद जोशीमठ से सेना का दल वाहन से सुतोल गांव के लिए रवाना हुआ। शनिवार से माउंट त्रिशूल क्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जाएगा।
सुतोल के दो लोग भी थे दल में शामिल
चमोली के घाट विकासखंड के सुतोल गांव के दो युवा दिनेश और ताजवर भी दल में शामिल थे। घटना की सूचना पर गांव में खलबली मच गई। पर्वतारोहियों की तलाश में देर शाम तक सुतोल गांव में सेना की टीम पहुंच गई थी। सुतोल गांव में ईको पर्यटन समिति के अध्यक्ष कमल सिंह ने बताया कि दल में 20 जवान, 20 पोर्टर और चार शेरपा (क्लाइबिंग विशेषज्ञ) शामिल थे। पोर्टर और शेरपा 18 सितंबर को सुतोल गांव से त्रिशूल के लिए रवाना हुए थे। जबकि नौ सेना का दल कमांडर कार्तिकेयन सुंदरम के नेतृत्व में 23 सितंबर को रवाना हुआ था। कमल सिंह ने बताया कि त्रिशूल चोटी से करीब 500 मीटर की दूरी पर कैंप-3 स्थित है। यहां से त्रिशूल की आखिरी चढ़ाई के लिए दल को निकलना था, इसी स्थान पर एवलांच आया है।
दल के छह सदस्य लापता: निम
माउंट त्रिशूल के आरोहण के दौरान लापता हुए दल की तलाश में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) का तीन सदस्यीय दल रवाना हो गया है। निम के अनुसार लापता हुए दल में नौ सेना के पांच सदस्य और एक शेरपा शामिल है। निम के रजिस्ट्रार विशाल रंजन ने बताया कि रेस्क्यू टीम में निम के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट, प्रशिक्षक दीप शाही व सौरभ रौतेला शामिल हैं। निम के रजिस्ट्रार विशाल रंजन ने बताया कि रेस्क्यू टीम में निम के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट, प्रशिक्षक दीप शाही व सौरभ रौतेला शामिल हैं। हालांकि, जोशीमठ में मौसम खराब होने के कारण टीम आगे नहीं बढ़ पाई। कर्नल अमित बिष्ट ने बताया कि मौसम साफ होते ही आगे बढ़ा जाएगा।
तीन चोटियों का समूह है त्रिशूल
7,120 मीटर की ऊंचाई पर स्थित त्रिशूल चोटी चमोली जनपद में है। इस चोटी के जोशीमठ और घाट से पर्वतारोही टीमें जाती हैं। नौसेना के पर्वतारोहियों की टीम भी घाट होते हुए त्रिशूल के लिए गई थी। तीन चोटियों का समूह होने के कारण इसे त्रिशूल कहा जाता है।
घटना की सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। वन विभाग के डीएफओ को भी मामले में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। एनडीआरएफ की टीम को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर हेलीकाप्टर की मदद भी ली जाएगी।
-हिमांशु खुराना, डीएम, चमोली।
वर्ष 2019 में नंदा देवी ईस्ट (7434मी) चोटी फतह करने आए 12 सदस्यीय दल के आठ लोग नंदा देवी आरोहण के दौरान बर्फीले तूफान की चपेट में आकर लापता हो गए थे। इनमें से सात के शव बरामद हो गए, लेकिन टीम लीडर मार्टिन का शव आज भी बर्फ में दफन है।
13 मई 2019 को पर्वतारोहियों का 12 सदस्यीय दल नंदा देवी आरोहण के लिए रवाना हुआ था। इस दौरान आए बर्फीले तूफान की चपेट में आकर ब्रिटेन निवासी टीम लीडर मार्टिन मोरिन, ब्रिटेन के ही पर्वतारोही जोन चार्लिस मैकलर्न, रिचर्ड प्याने, रूपर्ट वेवैल, अमेरिका के एंथोनी सुडेकम, रोनाल्ड बीमेल, आस्ट्रेलिया की महिला पर्वतारोही रूथ मैकंस और इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन के जनसंपर्क अधिकारी चेतन पांडे लापता हो गए थे।
बेस कैंप में मौजूद पोर्टरों और अन्य साथियों ने 31 मई को आठ पर्वतारोहियों के लापता होने की सूचना प्रशासन को दी। पर्वतारोहियों की खोज के लिए आईटीबीपी ने ऑपरेशन डेयरडेविल्स चलाया गया। इसमें टीम लीडर मार्टिन को छोड़ अन्य सभी पर्वतारोहियों के शव बरामद कर लिए गए थे।