हत्या की आशंका जताते हुए राठी ने यूपी से खुद को उत्तराखंड की जेल में शिफ्ट करवा लिया था। राठी के लिए उत्तराखंड की जेल पहले से ही मुफीद रही थी। राठी यह बात भी अच्छी तरह जानता था कि उसे मुख्तार से खतरा है लेकिन उत्तराखंड में यह खतरा कम है। सूत्रों के अनुसार मुख्तार के शूटरों से खतरे की आशंका के चलते ही वह यूपी में दर्ज मामलों में पेशी पर भी नहीं जाता था सिर्फ ऑनलाइन पेशी होता था। सूत्रों के अनुसार पौड़ी जेल में बंद राठी को बृहस्पतिवार रात में ही मुख्तार अंसारी की मौत की सूचना मिल गई थी।
जीवा से भी थी राठी की अदावत
मुन्ना बजरंगी की तरह वेस्ट यूपी का बदमाश संजीव उर्फ जीवा भी मुख्तार अंसारी का करीबी बताया जाता था। जीवा की भी सुनील राठी से अदावत थी। जानकारी के अनुसार यह अदावत जीवा के उत्तराखंड में अपराध जगत में एंट्री करने से शुरू हुई थी। राठी नहीं चाहता था कि जीवा उत्तराखंड में अपराध जगत में एंट्री कर उसके वर्चस्व को कम करे। यहीं से दोनों एक-दूसरे की आंखों में खटकने लगे थे। हालांकि, पिछले साल जीवा की लखनऊ की एक कोर्ट में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसका लाभ भी राठी को मिला था।