आयुर्वेद व मर्म चिकित्सा से कम किया जा सकता है एंटीबायोटिक दवाइयों का उपयोग
आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील जोशी ने कहा, आयुर्वेद विज्ञान दुनिया का प्राचीनतम चिकित्सा विज्ञान है। आयुर्वेद के स्वास्थ्य रक्षण संबंधी मौलिक सिद्धांतों, त्रिदोष, पंचमहाभूत, धातु, त्रिगुण, अष्टविथ नाड़ी परीक्षण, प्रकृति निर्धारण, दिनचर्या रितुचर्या, रात्रिचर्या, सद्वृत, स्वास्थ्य वर्धक आहार विहार एवं औषधियों आदि के माध्यम से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं। किसी भी तरह की बीमारी, वैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण होने पर हम मजबूती के साथ प्रतिरोध कर सकें। आयुर्वेद और मर्म चिकित्सा के माध्यम से एंटीबायोटिक एवं औषधियों के उपयोग को कम किया जा सकता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य में मील का पत्थर साबित होगा कार्यक्रम
एचएनबी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हेमचंद ने कहा कि अपनी तरह का एक विशिष्ट कार्यक्रम है। इसे देश में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। पब्लिक हेल्थ के प्रबंधन में यह कोर्स मील का पत्थर साबित होगा। भविष्य में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम को 15 दिवसीय या एक माह एवं सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्स के रूप में संचालित करने की आवश्यकता है।