उत्तराखंड में एक अप्रैल से जंगल की आग पर काबू पाने के लिए 10 हजार ग्राम प्रहरियों की तैनाती होगी। इनमें पांच हजार महिलाएं होंगी। वन विभाग ने इनके करीब सात माह के मानदेय के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की सरकार में नए सिरे से वन महकमा संभालने के बाद पहली बार बुधवार को वन मंत्री हरक सिंह रावत ने वन मुख्यालय की ओर रुख किया। हरक सिंह ने मंथन सभागार में अधिकारियों से बातचीत की और कहा कि बजट का समय रहते पूरा उपयोग कर लिया जाए।
बताया गया कि संरक्षित क्षेत्रों में करीब 80 प्रतिशत बजट का उपयोग कर लिया गया है। बाकी क्षेत्रों में 67 प्रतिशत बजट का उपयोग ही किया जा सका है। वन मंत्री ने कहा कि अगले दस दिनों में बजट का पूरा उपयोग कर लिया जाए।
वन मंत्री ने बताया कि कैंपा के तहत मानदेय के तहत फायर वाचर तैनात किए जाने हैं। इसके लिए 40 करोड़ का बजट जारी किया जा चुका है। इससे सात माह के मानदेय की व्यवस्था हो जाएगी। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने हाल ही में समीक्षा के दौरान दस हजार में से पांच हजार महिलाओं को फायरवाचर की जिम्मेदारी देने का आदेश दिया था।
पर्यावरण निदेशालय पर भी गई वन मंत्री की निगाह
वन मंत्री हरक सिंह ने अधिकारियों को पर्यावरण निदेशालय को जल्द से जल्द मजबूत करने का भी आदेश दिया। उन्होंने कहा कि शीर्ष संस्था के रूप में पर्यावरण निदेशालय का गठन कर लिया जाए।
फायर कर्मियों ने बुझाई जंगल की आग
गोपेश्वर में पठियालधार के पास जंगल में लगी आग को अग्निशमन विभाग ने समय रहते बुझा लिया, जिससे आग बस्ती तक नहीं पहुंच सकी। गोपेश्वर के पास पठियालधार के जंगल में बुधवार सुबह अचानक आग लग गई, जिससे आसपास धुआं फैल गया। वन विभाग के कर्मचारियों ने फायर स्टेशन को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंचे फायर कर्मियों ने जंगल में जहां तक पाइप पहुंच सकता था वहां पानी से आग बुझाई जबकि अन्य जगहों पर पेड़ की हरी टहनियों से आग को बुझाया गया। गनीमत रही समय से आग बुझा दी गई नहीं तो आग बस्ती तक पहुंच जाती। आग बुझाने में फायरमैन सत्येंद्र बगवाड़ी, अमित कुमार, विशाल नेगी, नंदू थापा, जयवीर सिंह, योगेंद्र डोभाल, पंकज डोभाल और प्रदीप टम्टा आदि शामिल थे।