बागेश्वर : जिले में नहीं है एक भी रोपवे
जिले में धार्मिक स्थलों के लिए रोपवे लगाने की घोषणा तो खूब हुई है, लेकिन रोपवे का निर्माण नहीं हुआ। जिले में वर्तमान में एक भी रोपवे नहीं है। जिला मुख्यालय के प्रमुख धार्मिक स्थल नीलेश्वर से चंडिका मंदिर तक रोपवे लगाने की घोषणा कई बार चुने हुए जनप्रतिनिधियों ने की। सरकार से भी आश्वासन मिला लेकिन रोपवे की सुविधा आज तक नहीं मिल सकी है। दोनों मंदिर आमने-सामने की चोटियों पर बने हैं। रोपवे से जहां लोग सरयू और गोमती नदी के विहंगम दृश्य का दीदार कर पाते, वहीं लोगों को रोजगार भी मिलता। पर्यटन को पंख लगते। सरकार कब बागेश्वर को रोपवे की सौगात देती है, यह भविष्य के गर्भ में है।
अल्मोड़ा : रोप-वे स्वीकृत होने के बाद भी नहीं बने
जिले में कहीं भी रोपवे नहीं हैं। राज्य बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने अल्मोड़ा नगर से कसारदेवी और पांडेखोला के अलावा स्याहीदेवी के लिए रोप-वे स्वीकृत किए थे ताकि अल्मोड़ा में पर्यटन गतिविधियों को गति मिल सके। रोप-वे बनना तो दूर इनका सर्वे तक का कार्य शुरू नहीं हो सका है। इसकी वजह से यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
चंपावत : काम नहीं कर रहे चार रोपवे
जिले में छह रोपवे (रज्जुमार्ग) हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ दो ही काम कर रहे हैं। उपराकोट से फुरकियाझाला और लोडियालसेरा से खिरद्वारी को छोड़ शेष चार रोपवे तकनीकी या दूसरे कारणों से काम नहीं कर रहे हैं। चार रोपवे खेती के उत्पादों को सड़क तक लाने के लिए प्रयुक्त किए जा रहे हैं। वहीं मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन के लिए हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक 903 मीटर लंबा रोपवे मंजूर है। 35 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मोड पर बनने वाले रोपवे की सारी अड़चनें दूर कर ली गईं हैं। अक्तूबर से इस रोपवे के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
पिथौरागढ़ : रोप वे से नहीं जुड़ सके पिथौरागढ़ के दर्शनीय और धार्मिक स्थल
पिथौरागढ़ जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दर्शनीय और धार्मिक स्थलों को रोपवे से जोड़ने की घोषणाएं पूरी नहीं हो सकी हैं। वर्ष 1994 में पिथौरागढ़ नगर को पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए ध्वज, चंडिका मंदिर, चंडाक- मोस्टामानू तक रोप वे लगाने का प्रस्ताव बना था। वर्ष 2014 में भी मुनस्यारी से खलियाटॉप तक रोप-वे की घोषणा हुई थी। इसके बाद चंडिका मंदिर, असुरचूला और ध्वज तक रोप वे का प्रस्ताव शासन को भेजा गया लेकिन आज तक रोप वे निर्माण की दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी है। केवल चुनाव के समय राजनीतिक दलों को रोप वे की याद आती है।
नैनीताल : एक रोपवे, केएमवीएन करता है इसका संचालन
नैनीताल में एकमात्र रोपवे है, जिसका संचालन कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) करता है। कोरोनाकाल में इसे अत्याधुनिक बनाया गया था। दूसरी लहर थमने के बाद इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। इसमें सैलानी मल्लीताल से स्नोव्यू तक आवाजाही करते हैं। रानीबाग से नैनीताल के लिए भी एक और रोपवे प्रस्तावित था, लेकिन आपत्ति लगने के बाद यह खटाई में पड़ गया है।