इसी आधार पर अभिनव यहां सेवाएं दे रहे हैं। शासन यूपीएससी की अनुशंसा पर सम्यक परीक्षण और सभी विधिक पहलुओं पर विचार करते हुए आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
ज्ञात हो कि 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी अभिनव कुमार को पिछले साल 30 नवंबर को डीजीपी पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह उस शिथिलता से हुआ था, जो देश के पांच राज्यों के लिए बरती गई थी। इसके तहत कहा गया था कि जहां डीजी रैंक के अधिकारी नहीं हैं, वहां 25 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके एडीजी रैंक के अधिकारी को कार्यकारी डीजीपी बनाया जा सकता है।
लेकिन, इस बीच देश के कई राज्यों को सुप्रीम कोर्ट से इस व्यवस्था को लेकर फटकार भी पड़ी। राज्य सरकार की ओर से नियमित डीजीपी के लिए सात पुलिस अफसरों के नाम यूपीएससी को भेजे गए। पिछले दिनों यूपीसीएससी ने नामों की समीक्षा कर तीन नामों का पैनल तैयार किया और इसका कार्यवृत्त उत्तराखंड सरकार को भेज दिया। नामों के पैनल में पहले स्थान पर रहे सेठ पांच साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी कर चुके हैं।