टिहरी जिले के नरेंद्रनगर ब्लॉक के जसोला पटवारी क्षेत्र के काटल गांव में मंगलवार की रात को बादल फटने की घटना के दूसरेे दिन भी प्रशासन की टीम गांव में नहीं पहुंच पाई। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन की टीम शिवपुरी से मात्र एक किलोमीटर से वापस नरेंद्रनगर लौट गई। नरेंद्रनगर के पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत ने काटल गांव पहुंचकर ग्रामीणों की पीड़ा सुनीं।
मंगलवार की रात को 10 बजे काटल गांव में बादल फटा था। बादल फटने के बाद के बाद काटल गदेरा ऊफान पर आ गया था। उफनते गदेरे की चपेट में आने से कई लोगों के खेत बह गए थे। वहीं कुछ लोगों के घरों के आंगन के आगे पुश्ते ढह गए थे। बुधवार को स्थानीय लोगों को प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिल पाई। बृहस्पतिवार को कृषि मंत्री सुबोध उनियाल और आपदा प्रबंधन मंत्री धन सिंह रावत के द्वारा हवाई दौरे होने की सूचना ग्रामीणों को मिली थी।
बताया जा रहा है कि विधानसभा सत्र के कारण वे नहीं आ सके। नरेंद्रनगर के पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत कई किलोमीटर पैदल चलकर काटल गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। स्थानीय निवासी राजवीर भंडारी, काटल नौडू की ग्राम प्रधान सीमा देवी ने कहा कि प्रशासन की टीम दूसरे दिन भी गांव में नहीं पहुंची। एसडीएम और प्रशासन की गाड़ी मार्ग बंद होने के चलते शिवपुरी से एक किलोमीटर आगे आकर वापस चली गई। जबकि शिवपुरी से काटल गांव की दूरी करीब 12 किलोमीटर है।
उन्होंने बताया कि शिवपुरी-तिमली मोटरमार्ग को खुलवाने के लिए लोनिवि नरेंद्रनगर के अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन मार्ग खुलवाने के लिए जेसीबी नहीं भेजी गई। दूसरे दिन भी शिवपुरी-तिमली मोटरमार्ग बंद रहा। गांव के आसपास जंगल कैंपों में जो पर्यटक फंसे थे, पांच पयर्टक बुधवार को पैदल चलकर शिवपुरी तक पहुंच गए थे, सात पर्यटक बृहस्पतिवार को पैदल ही शिवपुरी तक पहुंचे।
मंगलवार की रात को काटल गांव में बादल फटने की घटना के बाद तिमली, नौडू, काटल, और चौक गांव में विद्युत आपूर्ति ठप है। ऊर्जा निगम मुनिकीरेती के उपखंड अधिकारी मदन मोहन बहुगुणा ने बताया कि बादल फटने की घटना के बाद क्षेत्र में चार बिजली के पोल बह गए हैं, छोटी और बड़ी लाइन के 20 पोल क्षतिग्रस्त हुए हैं।
ऊर्जा निगम की टीम मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही है। मौसम साफ होते ही गांवों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। चौक गांव में फुंके ट्रांसफार्मर को भी बदला जाएगा। वहीं गांव में विद्युत आपूर्ति ठप होने से लोगों के मोबाइल फोन भी बंद हो गए हैं।
लोग अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। पेयजल स्रोत क्षतिग्रस्त होने से पेयजल लाइन के पाइपों में मलबा भर गया है। ऐसे में ग्रामीणों को पुराने स्रोतों और गेदेरे से पाने का पानी लाना पड़ रहा है। गांवों में बिजली न होने से काटल, चौक और तिमली गांवों में लोगों को हाथी के हमले का भी डर सता रहा है।