कोरोना की फर्जी जांच करने मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक्शन में आ गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एसपी हरिद्वार को फर्जी जांच करने वाली फर्मों के खिलाफ एसआईटी के माध्यम से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सीएम सख्त हिदायत दी कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी हरिद्वार ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट 16 अगस्त को शासन को सौंपी थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर फर्मों के साथ मिलीभगत से राज्य को वित्तीय हानि पहुंचाने लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग के दो अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। कोविड सैंपल जांच फर्जीवाड़े मामले में सरकार की यह पहली कार्रवाई है।
बता दें कि कुंभ में फर्मों की ओर से एंटीजन रैपिड टेस्टिंग की बिना जांच के किए गए लाखों का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने कोविड फर्जी रैपिड एंटीजन टेस्टिंग प्रकरण में संबंधित फर्मों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निर्देश दिए हैं।
हरिद्वार कुंभ के दौरान सामने आए आरटीपीसीआर जांच घोटाले में 22 हजार मोबाइल नंबरों के मालिकों का पता नहीं लग पाया है। मामले की जांच पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने न्याय विभाग को भेजी है। शुक्रवार को वह इस फाइल पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को भेजेंगे।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्वीकार किया कि कुंभ आरटीपीसीआर जांच में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि मामले में जांच टीम ने उन एक लाख दस हजार मोबाइल नंबरों का सत्यापन किया है, जिनके नाम पर आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट जारी हुई थी। इनमें से 22 हजार मोबाइल नंबर तो ऐसे हैं, जिनके मालिकों का पता ही नहीं चल पाया है।
यह आशंका है कि संबंधित कंपनी ने किसी एक जगह से डाटा लेकर सीधे जांच रिपोर्ट जारी कर दी। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर विभाग के भी कुछ अधिकारी इसमें लिप्त पाए गए हैं क्योंकि विभाग की कार्रवाई के बिना जांच रिपोर्ट का लिंक जारी ही नहीं हो सकता है। सभी पहलुओं को देखने, समझने के बाद वह अब मुख्यमंत्री को कार्रवाई के लिए फाइल भेजेंगे। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी होंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। सख्त कार्रवाई की जाएगी।