मुआवजे का मरहम लगे तो मुसीबतें हों कुछ कम
प्रदेश में आपदा और अतिवृष्टि से फसलें खराब होने से अन्नदाता जहां आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं, वहीं, कृषि विभाग का कहना है कि प्रभावितों को अभी मुआवजे का मरहम नहीं लग पाएगा। कृषि विभाग के निदेशक केसी पाठक बताते हैं कि फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जा रहा है। विभाग को अभी जो रिपोर्ट मिली है, उसमें फसलों की क्षति 33 प्रतिशत से कम है, जबकि केंद्र सरकार का मुआवजे को लेकर मानक 33 फीसदी से अधिक के नुकसान का है।
इन जिलों में नहीं हुआ अभी कोई नुकसान
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली प्रदेश के ऐसे जिले हैं, जिनमें आपदा और अतिवृष्टि से अभी कोई नुकसान नहीं हुआ। आपदा और अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। 33 फीसदी से अधिक के नुकसान पर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। जिनका बीमा है, उन्हें संबंधित कंपनी बीमा राशि देगी, जबकि अन्य प्रभावितों की किस तरह से मदद की जा सके, इसके लिए रास्ता निकाला जाएगा। -गणेश जोशी, कृषि मंत्री
रामपुर गांव के खेतों में आया मलबा
रुद्रप्रयाग। अगस्त्यमुनि ब्लॉक के बच्छणस्यूं पट्टी के मध्य क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाले निर्माणाधीन दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग के मलबे से रामपुर गांव की खेती चौपट हो गई है। साथ ही पेयजल लाइन भी लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग से मलबे से पटे खेतों की सफाई और नियमित पेयजल आपूर्ति करने की मांग की है। वर्ष 2018 में बच्छणस्यूं के ग्राम पंचायत खांकरा, निषणी और बंगोली के रामपुर, मरगांव, पौड़ीखाल, पणधारा, कलेथ आदि गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने को दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग का निर्माण शुरू किया गया। रामपुर गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद, वेद प्रकाश, रामकृष्ण रतूडी, चंद्रमोहन रौथाण, बसंत सिंह बिष्ट, बादर सिंह, रमेश सिंह, जगत सिंह, देवेंद्र सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने सड़क कटान का मलबा गदेरे में डंप किया, जो वर्ष 2021 की बरसात में भारी अतिवृष्टि से उनके खेतों तक पहुंच गया था।