कुली का काम किया, अखबार भी निकाला
सेना में अच्छी नौकरी छोड़कर वह स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए तो शुरुआती दौर में उन्हें कुली का काम करना पड़ा। उनकी पुत्री उमा रानी के आलेख के मुताबिक परिवार की जमींदारी से हिस्सा न लेना पड़े इसलिए उन्होंने हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू किया। बिजनौर से गरीब नाम का एक अखबार भी उन्होंने निकाला और आजादी के लिए युवाओं को प्रेरित करने लगे। आजादी के बाद वह पहले दून के अजबपुर में रहे, जहां वह दूध बेचने का काम करते थे। इसके बाद त्यागी रोड पर बनी कोठी में शिफ्ट हुए।
गजट में दर्ज है त्यागी पुलिस के सराहनीय प्रयास
इतिहास के जानकार कहते हैं कि महावीर त्यागी ने किसानों के लिए बहुत काम किया। देहरादून के जौनसार बाबर क्षेत्र में भूमि सुधार व किसानों के ऋण की समस्या को हल करने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। इसमें उन्होंने सदस्य रहते हुए किसानों के लिए कर्ज मुक्ति कानून बनवाया। आजादी के बाद सांप्रदायिक संघर्ष की स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने पुलिस की वर्दी धारण की और एक विशेष पुलिस दल बनाया। जो दंगे में अपनी जान की परवाह न करते हुए लोगों की जान बचाने का काम करता था। इस संगठन को यूपी के सरकारी गजट में त्यागी पुलिस का नाम दिया गया। गोविंद बल्लभ पंत व लाल बहादुर शास्त्री ने लोगों की जान बचाने में त्यागी पुलिस के प्रयासों की सराहना की थी।