प्रदेश की पांच लोकसभा सीटों के लिए 19 अप्रैल को मतदान होने जा रहा है। पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनावों के ट्रेंड देखें तो पर्वतीय जिले मतदान में पिछड़ते रहे हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ों में मतदान का माहौल ठंडा रहता है और मैदान में गर्म। पिछले चार लोकसभा चुनावों के नतीजे तो इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि हर बार पर्वतीय सीटों (अल्मोड़ा, टिहरी और गढ़वाल) पर मतदान प्रतिशत मैदानी सीटों (हरिद्वार व नैनीताल-ऊधमसिंह नगर) के मुकाबले काफी कम रहा है। इस बार चुनाव आयोग ने इसे बढ़ाने के लिए खास तैयारी की है।
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बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पांच पर्वतीय जिलों में मतदान प्रतिशत 55 से भी नीचे रहा। इनमें रुद्रप्रयाग में 54.21 प्रतिशत, टिहरी में 49.32 प्रतिशत, पौड़ी में 50.88 प्रतिशत, पिथौरागढ़ में 52.09 प्रतिशत और अल्मोड़ा में 47.75 प्रतिशत मतदान शामिल है।
हालांकि, दो पर्वतीय जिलों उत्तरकाशी में 60.60 प्रतिशत और चमोली में 56.60 प्रतिशत मतदान हुआ था। बागेश्वर-चंपावत में भी प्रतिशत 55 से ऊपर रहा था। निर्वाचन कार्यालय ने इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ाने की खास तैयारी की है। इसके तहत जहां मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से हर गांव के हर बूथ तक मतदाताओं को मतदान को लाने की कवायद की जा रही है तो लगातार जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।