23 जनवरी से 29 जनवरी के बीच पिथौरागढ़ और चंपावत जनपद में किये गये सर्वे में यह सामने आया है कि स्कूल छोड़ने के मामलों की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। याची की ओर से कोर्ट यह भी बताया गया कि बाल विवाह का समाज पर भी प्रभाव पड़ता हैं।
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बाल विवाह पर रोक लगाने के लिये सरकार की ओर से वर्ष 2016 में नियमावली तैयार की गयी है। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने इस मामले को सुनने के बाद 12 नवंबर को जनहित याचिका निस्तारित की थी। इस आदेश की प्रतिलिपि याची के अधिवक्ता को बृहस्पतिवार को मिली ।