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निजी डाक्टरों की हड़ताल पर हाईकोर्ट सख्त, कहा सरकार की जिम्मेदारी है बिना इलाज न रहे कोई मरीज

Thu, 21 Feb 2019 08:26 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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हाईकोर्ट ने कहा है कि यह राज्य सरकार का दायित्व है कि कोई भी मरीज बिना इलाज न रहे। निजी चिकित्सालय संचालकों और चिकित्सकों की हड़ताल को देखते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार चाहे बाहर से डाक्टर लाए या संविदा पर डाक्टरों की तैनाती करे।

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जो भी विकल्प हो उस पर कार्यवाही कर एक सप्ताह में कोर्ट में रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने आईएमए से राज्य में पंजीकृत क्लीनिकों की जानकारी मांगी और सरकार को यह बताने को कहा कि निजी चिकित्सक हड़ताल पर जा सकते हैं या नहीं। 

हल्द्वानी निवासी गुरविंदर सिंह चड्ढा की याचिका पर सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने कहा कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट हाईकोर्ट के आदेश पर ही लागू किया गया है।

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इसकी पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई है और सर्वोच्च न्यायालय में भी कोई अपील दायर नहीं की गई है। ऐसे में राज्य सरकार एक्ट लाने के लिए बाध्य है। आईएमए एक सप्ताह के अंदर पंजीकृत क्लीनिकों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे ताकि हड़ताल पर रहने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जा सके। 

खंडपीठ ने कहा कि मरीजों को कोई परेशानी न हो हो, इसके लिए हर संभव स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के खिलाफ 15 फरवरी से निजी डाक्टर एवं अस्पताल हड़ताल पर हैं।

इसके खिलाफ गुरविंदर ने मंगलवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याची का कहना था कि निजी डाक्टरों की हड़ताल से लोग परेशान हो रहे हैं। वे  सरकारी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवा नाकाफी है। राज्य सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया जाए।
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