याचिकाकर्ताओं ने सरकार की 2013 की नियमितीकरण नियमावली को चुनौती दी और कहा कि कहा कि नियमितीकरण नियमावली सुप्रीम कोर्ट के उमादेवी और एमएल केशरी मामले में दिए गए फैसले के विपरीत है।
सरकार फिर भी निगमों, विभागों, परिषदों और अन्य सरकारी उपक्रमों में बिना किसी चयन प्रक्रिया के कर्मचारियों का नियमितीकरण कर रही है। याचिका में कहा गया कि सरकार ने वर्ष 2016 में इस नियमावली में संशोधन किया था। इस संशोधित नियमावली को हिमांशु जोशी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस संशोधित नियमावली को कोर्ट पूर्व में ही निरस्त कर चुका है।