उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार हड़ताल करने पर उनके खिलाफ एस्मा लगाने जा रही है। याचिका में कहा गया कि सरकार कर्मचारियों को हड़ताल करने पर मजबूर करती आई है। सरकार न तो संविदा कर्मचारियों को नियमित कर रही है और ना ही उनको नियमित वेतन दिया जा रहा है। उनको पिछले चार साल से ओवर टाइम भी नहीं दिया जा रहा है।
रिटायर कर्मचारियों के देयकों का भुगतान भी नहीं किया गया है। यूनियन का सरकार और निगम के साथ कई बार मांगों को लेकर समझौता हो चुका है। इसके बावजूद सरकार एस्मा लगाने के लिए तैयार है। सरकार ने निगम को 45 करोड़ रुपया बकाया देना है। वहीं, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भी निगम को 700 करोड़ रुपये देने हैं। न तो राज्य सरकार निगम को उनका 45 करोड़ रुपये दे रही है और ना ही राज्य सरकार उत्तर प्रदेश सरकार से 700 करोड़ रुपये मांग रही है। इस वजह से निगम न तो नई बसें खरीद पा रहा है और ना ही बस में यात्रियों की सुविधाओं के लिए सीसीटीवी सहित अन्य सुविधाएं दे पा रहा है। इधर उनको फरवरी से वेतन तक नहीं दिया गया है।