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हाईकोर्ट: जनरल-ओबीसी कर्मचारी मामले में सुनवाई, एनएच 74 घोटाले में अवमानना नोटिस समेत अन्य खबरें...

Fri, 06 Mar 2020 09:53 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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नैनीताल हाईकोर्ट ने जनरल ओबीसी एम्प्लाइज एसोसिएशन की ओर से प्रदेशभर में की जा रही हड़ताल के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद इसे अन्य बेंच को रेफर करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए अगले सप्ताह की तिथि नियत की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति रवि विजय कुमार मलिमथ की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

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देहरादून निवासी ललित कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज एसोसिएशन के करीब डेढ़ लाख कर्मचारी पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ दो मार्च से हड़ताल पर हैं। याचिका में कहा गया कि कर्मचारियों की हड़ताल से सभी राजकीय कार्य बाधित हो रहे हैं। हड़ताली कर्मचारी हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि या तो कर्मचारी अपनी हड़ताल वापस लें या हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।

एनएच 74 निर्माण में देरी पर प्रोजेक्ट मैनेजर को अवमानना नोटिस जारी

ऊधमसिंह नगर में एनएच 74 के निर्माण कार्य में हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने प्रोजेक्ट मैनेजर को अवमानना नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट ने प्रोजेक्ट मैनेजर से पूछा है कि कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

ऊधमसिंह नगर निवासी अजय तिवारी ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि 21 अगस्त 2018 को हाईकोर्ट ने एनएच-74 के निर्माण कार्य को छह माह के भीतर पूरा करने को कहा था। इसके बाद भी काम पूरा नहीं हो सका तो कंपनी ने कोर्ट से और समय मांगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने 3 मई 2019 को आदेश दिया कि 21 अगस्त 2019 तक कार्य पूरा करें। इसके बावजूद कार्य पूरा नहीं हुआ है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने प्रोजेक्ट मैनेजर को अवमानना नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
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जसपुर नगरपालिका अध्यक्ष को हाईकोर्ट से राहत

हाईकोर्ट ने निर्वाचन अधिकारी जसपुर के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें उन्होंने जसपुर नगरपालिका अध्यक्ष का नाम मतदाता सूची से हटाने के आदेश दिए थे। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

नगरपालिका परिषद जसपुर की अध्यक्ष मुमताज बेगम ने हाईकोर्ट में याचिका दायरकर कहा था कि वह 20 नवंबर 2018 को बहुजन समाज पार्टी से निर्वाचित हुईं थीं। इसके बाद एक व्यक्ति देहरादून निवासी नावेद आलम ने राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत की थी कि उनका (मुमताज बेगम) नाम नगर पंचायत इस्लामनगर बदायूं की मतदाता सूची में भी दर्ज है, इसलिए उनका नाम जसपुर की मतदाता सूची से हटाया जाए। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने अपना नाम नगर पंचायत इस्लामनगर बदायूं की मतदाता सूची से हटाने के लिए 24 मार्च 2018 को प्रार्थना पत्र दे दिया था। इसके बाद उनका नाम मतदाता सूची से विलोपित कर दिया गया था। 

याचिका में कहा गया कि इस प्रकरण की जांच तहसीलदार जसपुर की ओर से की गई तथा जांच में पाया गया कि आलम ने कोई भी प्रार्थना पत्र नहीं दिया है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने अन्य तहसीलदार जसपुर से जांच कराकर  रिपोर्ट मांगी  थी। राज्य निर्वाचन आयोग ने 26 फरवरी 2020 को जिला निर्वाचन अधिकारी स्थानीय निकाय ऊधमसिंह नगर को आदेश दिया कि उनका (मुमताज बेगम) नाम जसपुर की मतदाता सूची से हटा दिया जाए। इस आदेश को याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि इसमें उनको सुनवाई का मौका दिए बिना ही यह आदेश पारित किया गया है जो नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के विपरित है।
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