हल्द्वानी जेल में विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस की जांच तीन माह बाद भी आगे नहीं बढ़ सकी। पांच मार्च को कुंडेश्वरी चौकी पुलिस ने विचाराधीन कैदी की पत्नी की शिकायत पर उसके के खिलाफ बेटी से छेड़छाड़ करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। वह नशे का आदी बताया गया था। पुलिस ने उसी दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। छह मार्च को हल्द्वानी जेल में उसकी संदिग्ध हालत में मौत हो गई।
इसी दौरान जेल से रिहा होकर आए सितारगंज निवासी राहुल श्रीवास्तव ने काशीपुर आकर मृतक की पत्नी को बताया था कि जेल में बंदी रक्षकों की पिटाई के कारण उसके पति की हालत बिगड़ गई जिससे उसकी मौत हो गई। विचारधीन कैदी की पत्नी ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर मुख्य बंदीरक्षक समेत चार के खिलाफ हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मामले की विवेचना हल्द्वानी कोतवाल मनोज रतूड़ी कर रहे हैं, लेकिन तीन माह बाद भी पुलिस की जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
मृतक की पत्नी ने अपने अधिवक्ता संजीव आकाश के माध्यम से नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया कि पुलिस ने मामले के इकलौते गवाह राहुल श्रीवास्तव का बयान अभी तक दर्ज नहीं किया है। पुलिस ऐसे लोगों के बयान रिकार्ड कर रही है, जिनका इस केस से कोई संबंध नहीं है।
चार वर्ष पूर्व कटोराताल चौकी में पुलिस अभिरक्षा में मरे बैलजूड़ी निवासी जियाउद्दीन की मौत के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। काजीबाग निवासी एक युवती को भगा ले जाने के आरोप में कटोराताल पुलिस ने कुंडा थाने के ग्राम बैलजूड़ी निवासी 16 वर्षीय जियाउद्दीन को 23 फरवरी, 2017 को हिरासत में लिया था।
28 फरवरी की शाम उसका शव पुलिस चौकी की बैरक में पंखे से लटका मिला था। मृतक के पिता मौ. यामीन ने कटोराताल चौकी के तत्कालीन प्रभारी प्रवीण कुमार सिंह, कांस्टेबिल बलवंत सिंह व वीरेंद्र कुमार समेत पांच अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इस मुकदमे की विवेचना पहले नैनीताल के इंस्पेक्टर विपिन चंद्र पंत ने की।
इसके बाद सीबीसीआईडी के निरीक्षक बीएस धौनी ने मामले की जांच शुरू की। 17 मार्च को नैनीताल हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। 19 सितंबर को हाईकोर्ट ने जियाउद्दीन की मौत के मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। मामले में विवेचना सीबीआई (एसपीई) के सीओ एमएस नेगी को सौंपी गई थी। यह जांच अभी भी गतिमान है।