राज्यसभा सदस्य और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से उत्तराखंड हाईकोर्ट में देवस्थानम अधिनियम के खिलाफ याचिका दायर होने से सरकार की परेशानी में इजाफा होना तय है। चारों धामों के मंदिरों का श्राइन बोर्ड की तर्ज पर प्रबंधन करने के लिए प्रदेश सरकार यह अधिनियम लेकर आई थी।
कुछ समय पहले ही तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने देवस्थानम अधिनियम के विरोध में सुब्रमण्यम स्वामी से संपर्क किया था। स्वामी ने महापंचायत को अदालत में इस मामले को चुनौती देने का आश्वासन दिया था। सोमवार को स्वामी ने ट्वीट किया कि वे इस अधिनियम को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने जा रहे हैं। स्वामी के इस ट्वीट को कुछ समय बाद ही 15 हजार लाइक मिल गए। यह ट्वीट 3376 रिट्वीट भी किया गया। देर शाम यह याचिका दाखिल भी हो गई।
याचिका दायर होने के बाद अब प्रदेश सरकार की परेशानी में इजाफा होना तय है। सूत्रों के मुताबिक चीफ जस्टिस की बेंच मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करेगी। स्वामी ने प्रदेश सरकार के साथ ही केंद्र सरकार को इस मामले में पार्टी बनाया है। स्वामी ने कहा है कि सरकार जल्दबाजी मेें इस अधिनियम को लेकर आई। मंदिर समिति पर किसी तरह का कोई आरोप भी नहीं था। बिना किसी शिकायत के मंदिरों की व्यवस्था करने का अधिकार मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों से छीन लिया गया।
इससे अधिनियम के विरोध मेें अभी तक चुप बैठी कांग्रेस को भी मुखर होने का मौका मिला है। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के मुताबिक भाजपा के वरिष्ठ नेता ही इस अधिनियम के विरोध में याचिका दायर की है। साफ है कि भाजपा में ही इस अधिनियम को लेकर एक राय नहीं है। कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि सत्ता में आते ही वह इस अधिनियम को वापस लेगी।