राज्य स्थापना के 13 साल बाद अब उत्तराखंड दो राजधानियों का प्रदेश बनने जा रहा है। स्थापना दिवस पर प्रदेश सरकार गैरसैंण में विधान भवन का शिलान्यास करने जा रही है।
रायपुर में होगा शिलान्यास
19 नंवबर को देहरादून में रायपुर में प्रदेश सरकार विधान भवन का भी शिलान्यास होगा। यह तब है जबकि प्रदेश में स्थायी राजधानी के चयन के लिए बाकायदा एक आयोग का गठन किया गया था और इस आयोग ने पूरे आठ साल के इंतजार के बाद सरकार को अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी थी। हालांकि आयोग की रिपोर्ट भी स्थायी राजधानी के मुद्दे को और उलझाने वाली ही साबित हुई।
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गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग राज्य गठन के तुरंत बाद से ही उठनी शुरू हो गई थी। हाल यह था कि पहली अंतरिम सरकार को ही इस मसले पर आयोग का गठन करना पड़ा था। इस आयोग की रिपोर्ट हालांकि कई साल केबाद ही सरकार को मिल पाई।
राजधानी चयन आयोग ने जनभावना को देखते हुए गैरसैंण को राजधानी मानना स्वीकार किया था पर अन्य मानकों में देहरादून को आगे रखा। साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि राजधानी का मसला बहुत कुछ जनभावनाओं पर निर्भर करता है। साफ है कि आयोग की रिपोर्ट ने स्थायी राजधानी के मसले को सुलझाने की बजाय और उलझा दिया।
स्थायी राजधानी के मुद्दे पर चुप्पी
दून की सुविधा और जनभावनाओं की इस टकराहट का ही नतीजा रहा कि पिछले 12 सालों तक राजनीतिक दलों ने स्थायी राजधानी के मुद्दे पर चुप्पी साध कर रखी। कवर्तमान कांग्रेस सरकार ने हिम्मत दिखाई और गैरसैंण में बाकायदा विधानभवन बनाने की घोषणा की।
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यहां तक भी मामला ठीक ही था पर इसकेतुरंत बाद ही सरकार ने देहरादून में नया विधानभवन बनाने का ऐलान कर दिया।
तर्क यह दिया गया कि देहरादून में विधानभवन की जरूरत है और इसके लिए 13वें वित्त आयोग से 80 करोड़ रुपए भी मिल चुके हैं। इस पैसे का उपयोग करने के लिए देहरादून में विधानभवन बनाया जा रहा है। दो विधानसभाएं बनने से साफ है कि प्रदेश को फिलहाल स्थायी राजधानी नहीं मिल पाएगी।
सरकार हालांकि अगले सत्र से एक विधानसभा सत्र गैरसैंण में आयोजित करने का इरादा जाहिर कर रही है पर यह भी उत्तराखंड को जम्मू कश्मीर की तरह ही प्रदेश को दो राजधानियों की ओर ले जा रहा है।
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