फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड बचाना है, भू-कानून लाना है.. मातृशक्ति उतरी सड़कों पर

विज्ञापन
भू कानून की मांग को लेकर विधानसभा कूच करटे जांरहे हैं राज्य आंदोलनकारियों रिस्पना पुल के समीप कि? - फोटो : DEHRADUN
विज्ञापन
देहरादून। भू-कानून की मांग को लेकर भारी संख्या में आंदोलनकारी विधानसभा कूच करने पहुंचे। इस दौरान मातृशक्ति ने अपनी बुलंद आवाज में ‘उत्तराखंड बचाना है, भू-कानून लाना है’ के नारे लगाए। देर तक जब आंदोलनकारी सड़क से नहीं उठे तो करीब 60 आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
विज्ञापन

शनिवार दोपहर 12 बजे राज्य आंदोलनकारी व देव भूमि युवा संगठन के प्रतिनिधि नेहरू कॉलोनी स्थित शहीद रविंद्र रावत (पोलू स्मारक) पर एकत्रित हुए। यहां से हाथो में बैनर, तख्तियां लेकर हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू-कानून/मूलनिवास लागू करने व राज्य आंदोलनकारियों के 10% क्षैतिज आरक्षण का शासनादेश/एक्ट तत्काल जारी करने की मांग को लेकर विधानसभा कूच किया। लेकिन पुलिस बल ने पहले ही रिस्पना के पास बैरिकेड लगाकर आंदोलनकारियों को रोक दिया। इस दौरान आंदोलनकारियों की पुलिस के साथ धक्कामुक्की हुई और आंदोलनकारी सड़क पर ही बैठ गए। काफी देर तक जब आंदोलनकारी यहां से नहीं उठे तो जिला प्रशासन की ओर से पहले सरकार के साथ वार्ता का प्रयास किया गया। लेकिन नगर मजिस्ट्रेट व पुलिस प्रशासन द्वारा सत्र की व्यस्तता के चलते वार्ता में असमर्थता जताई गई। जिस पर आक्रोशित राज्य आंदोलनकारी जबरन आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इसके बाद पुलिस ने ट्रैफिक खोलने के लिए आंदोलनकारियों को सड़क से उठने के लिए कहा। लेकिन आंदोलनकारी नहीं माने। बाद लगभग 60 आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्हें पोलू स्मारक पर छोड़ दिया गया। इसके बाद ट्रैफिक खोला जा सका। इस मौके पर ओमी उनियाल, जगमोहन सिंह नेगी, प्रदीप कुकरेती, सत्या पोखरियाल, बीना बहुगुणा, पूरण सिंह लिंगवाल, रुकम पोखरियाल, वेद प्रकाश शर्मा, रुकम पोखरियाल, विक्रम भंडारी, वेदा कोठारी, प्यारेलाल जुगरान, भानु रावत, केशव उनियाल, जगदीश चौहान, जब्बर सिंह पावेल, क्रांति कुकरेती अंबुज शर्मा, सुलोचना भट्ट, राधा रतूड़ी आदि थे।
जल, जंगल, जमीन पर हमें हमारा हक चाहिए
ये राज्य इसलिए नहीं बनाया गया था, कि भूमाफिया यहां की कब्जा कर लें। हमने बड़े-बड़े मॉल नहीं मांगे। हमें केवल हमारे जल, जंगल, जमीन पर हक चाहिए। सरकार हिमाचल की तर्ज पर राज्य में भी मजबूत भू-कानून लागू करे। अन्यथा इस राज्य के लोग धीर-धीरे अपना ही हक खो देंगे।
विज्ञापन

-शकुंतला रावत, आंदोलनकारी
भूमाफिया के कब्जे में नहीं जाने देंगे राज्य
यह दुर्भाग्य है, इस राज्य का कि आज भी मातृशक्ति सड़कों पर उतरकर अपने हक के लिए लड़ रही है। सरकार को नहीं भूलना चाहिए कि यह वही मातृशक्ति है। जिसने राज्य के लिए लड़ाई लड़ी थी। अब अपने जल, जंगल और जमीन के लिए लड़ रही हैं। राज्य में भूमाफिया का कब्जा होता जा रहा है। जिसे हम सहन नहीं करेंगे।
- विरेंद्र सिंह रावत राज्य आंदोलनकारी
सरकार आंदोलन के लिए न करे मजबूर
पलायन की मार यह राज्य झेल रहा है। युवाओं के सामने बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है। और भू-माफिया तेजी से जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। राज्य के लोगों का हक छीना जा रहा है। उनके हक तय होने चाहिए। उत्तराखंड सरकार को अपने पड़ोसी राज्य हिमाचल से सीखना चाहिए। हिमाचल की तर्ज पर उत्तराखंड में भूकानून क्यों लागू नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन

-सुलोचना भट्ट, आंदोलनकारी

भू कानून की मांग को लेकर विधानसभा कूच करने जा रहे हैं राज्य आंदोलनकारियों व पुलिस के बीच में धक्क?- फोटो : DEHRADUN

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें