इनका कहना है कि गंगा के प्रति भावना का ध्यान रखा जाना चाहिए था। सरकार चाहे तो फैसला ले ले और शासनादेश निरस्त कर दे। रावत ने संतों से माफी तो मांग ली पर प्रदेश के दूसरे रावत को उलझा दिया।
अब प्रदेश सरकार के पाले में गेंद है और उसे फैसला करना होगा कि वह स्केप चेनल का नाम बदले और अतिक्रमण हटाने की राह पकड़े या फिर समस्या का समाधान न निकालने पर संतों की नाराजगी का सामना करे।
प्रदेश सरकार को फैसला करना है और सरकार सभी पक्षों से बात कर इस समस्या का समाधान भी निकालेगी। इसके लिए अखाड़ा परिषद और गंगा सभा आदि से बात की जाएगी। बैठक भी बुला ली गई है।
-मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता