फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Interview: राज्यपाल बोले- अग्निवीरों के लिए आरक्षण की पहल तो उत्तराखंड को करनी थी, पढ़ें खास बातचीत

Sun, 21 Jul 2024 02:09 PM IST
अलका त्यागी अनूप वाजपेयी, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
राज्यपाल गुरमीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह हरियाणा सरकार के अग्निवीरों के लिए दस फीसदी आरक्षण को सही दिशा में उठाया गया ठोस कदम मानते हैं। उन्होंने साफगोई से कहा कि इस काम में भी उत्तराखंड को अगुवाई कर पहला राज्य बनना चाहिए था। हमारे राज्य से बड़ी संख्या में युवा सेना में जाने को उत्सुक रहते हैं। भारतीय सेना में 17.2 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तराखंड की है। ऐसे में उत्तराखंड को तो पहल करनी चाहिए थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं फौजी के बेटे हैं उन्हें कुछ बताने की भी जरूरत नहीं है इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

विज्ञापन


राज्यपाल का कहना है कि सैन्य बलों की नई भर्ती योजना अग्निपथ में कठिन ट्रेनिंग, संयम, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पित ऐसा जुझारू युवा तैयार हो रहा है जिसका विभिन्न क्षेत्रों में हम बेहतर उपयोग कर सकते हैं। राज्यपाल ने शनिवार को अमर उजाला संपादक के साथ विशेष बातचीत में अग्निवीर योजना के साथ राज्य से जुड़े कुछ ऐसे मुद्दों पर अपनी राय रखी जो आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को मजबूती दे सकते हैं।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि अग्निवीरों की भर्ती को लेकर राजनीति और सार्वजनिक मंचों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। इस संवेदनशील मुददे पर सिर्फ सरकार और सेना को फैसला लेना चाहिए। सेना के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में सेना को बड़ी संख्या में युवाओं की आवश्यकता है। सेना में पहले भी शॉर्टटर्म भर्तियां होती रही हैं। अग्निवीर के माध्यम से अधिक से अधिक युवाओं को सेना से जोड़ा जा रहा है जो हमारी सीमाओं के कठिन स्थानों पर तैनात रहकर दुश्मन के दांत खटटे कर सकें। उनका कहना है कि पहले की अपेक्षा सेना की चुनौतियां बदली हैं। चीन से लगी सीमाओं पर हमारे युवा सैनिक बेहतर ढंग से सुरक्षा कवच बन सकते हैं।
विज्ञापन


Uttarakhand: सीएम धामी की घोषणा, अग्निवीरों को आरक्षण देगी सरकार, कहा- जरूरत पड़ी तो बनाएंगे कानून

Trending Videos
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि अग्निपथ के लिए जो युवा स्वेच्छा से आ रहे हैं वे राष्ट्र के प्रति समर्पण और सेवा का भाव लेकर आएं हैं। हमारी सीमाओं की रक्षा का जज्बा लेकर आ रहे हैं, ऐसे में अगर हम इसे सामान्य चर्चा का विषय बना देंगे और खामियों को सार्वजनिक करेंगे तो उनका मनोबल टूटेगा। जबकि हमारी कोशिश उनके भविष्य को सुरक्षित करने की होनी चाहिए।

अगर कोई अग्निवीर देश के लिए बलिदान होता है तो हम सब का फर्ज है उनके परिवार के साथ खड़े हों। इन युवाओं को जिस तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है उसका इस्तेमाल एक निश्चित समय के लिए नहीं है बल्कि समाज को लंबे समय तक मजबूती देगा। वे सामान्य युवाओं से अलग होंगे लिहाजा उन्हें अर्धसैनिक बलों के साथ अन्य जगहों पर मौका दिया जाना चाहिए।

उत्तराखंड की प्रगति में कहां बाधा आ रही है और राज्य सरकार को किस दिशा में बढ़ना चाहिए इस पर राज्यपाल ने बताया कि हमारे धार्मिक स्थान और पर्यटन स्थलों पर हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं। वाहनों का काफिला जिस तेजी से पहाड़ों की ओर बढ़ रहा है उसे नियंत्रित करने के लिए पार्किंग स्थलों की योजना बनानी होगी। कुमाऊं में बाबा नीब करौरी धाम, ऋषिकेश, मसूरी के लिए विस्तृत योजनाओं को मूर्त रूप देना ही होगा। केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणाओं खासकर रोपवे पर जल्द मूर्त रूप ले।

उत्तराखंड आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए होम स्टे योजना को और बढ़ावा देना चाहिए। स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने और आर्थिकी को मजबूती देने में शहद उत्पादन और सुगंध उद्योग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मील का पत्थर साबित हो सकता है। राज्यपाल महिला सहायता समूहों की मजबूती को पूरे राज्य मजबूती की रीढ़ मानते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें