विकासकर्ताओं ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया कि लॉकडाउन के कारण वे अपना प्रोजेक्ट समय पर शुरू नहीं कर सकते। समय पर प्रोजेक्ट शुरू न होने से उनकी बिजली बेचने की जो दरें तय की गई हैं, वे कम हो जाएंगी। इस घाटे से बचाने के लिए उन्होंने आयोग से प्रोजेक्ट लगाए जाने की अवधि बढ़ाने और लागू टैरिफ को जारी रखने का अनुरोध किया।
विकास कर्ताओं की दिक्कतें
कइयों को भूमि का लैंड यूज चेंज कराना है। कुछ के बैंक ऋण का मामला प्रक्रिया में है। कुछ को प्लांट लगाने के लिए साइट पर जाना है, लेकिन लॉकडाउन में आवाजाही पर रोक होने के कारण संभव नहीं हो पाया। मार्च महीने में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण समय खराब हुआ। उसके बाद करीब महीने से लॉकडाउन जारी है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि लॉकडाउन अवधि को ध्यान में रखकर विकासकर्ताओं को राहत दे दी जाए। आयोग को प्रस्ताव चला गया है। अभी यह पता नहीं कि लॉकडाउन कब तक रहेगा। लेकिन प्रस्ताव यही है कि विकासकर्ताओं को समय सीमा में राहत देते समय कर्मचारियों की एक महीने चली हड़ताल, लॉकडाउन की समयसीमा तथा 30 दिन अतिरिक्त शामिल करते हुए राहत दी जाएगी।
- एके त्यागी, मुख्य परियोजना अधिकारी, उरेडा