चुनावी वर्ष में उत्तराखंड सरकार ने पूर्व सैनिकों व अर्द्ध सैनिक बलों के रिटायर्ड कर्मियों को सियासी चश्मे से देखना शुरू कर दिया है।
चार साल तक सैनिकों के नाम पर शांत रही सरकार ने इस बड़े वर्ग को साधने के लिए सियासी तौर पर होमवर्क शुरू कर दिया है। वोट बैंक के लिहाज से प्रभावशाली माने जाने वाले इस वर्ग को लुभाने के लिए सरकार ने एक चाय पार्टी का इंतजाम किया है। ताकि फौजियों के बीच सरकार की छवि बेहतर की जा सके।
सीएम हरीश रावत ने फौजी बिरादरी के बड़े चेहरों को चाय पर आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। इन चेहरों को जुटाने की जिम्मेदारी सैनिक कल्याण विभाग को को दी गई है। विभाग के आला अफसरों ने गुरुवार को सचिवालय में बैठक कर मंथन भी किया। गौरतलब है कि प्रदेश में सैनिकों और अर्द्धसैनिक बल के जवानों और आश्रितों के 10 लाख से अधिक वोट हैं।
प्रदेश में पौने तीन लाख कार्यरत और रिटायर सैनिक हैं, जबकि अर्द्धसैनिक बलों से रिटायर कर्मचारियों की संख्या एक लाख है। यह बड़ा वोट बैंक है, जिसमें अब तक भाजपा की पकड़ मजबूत रही है। ऐसे में सरकार फौजियों को रिझाने के लिए अलग से रणनीति तैयार कर रही है।
सीएम हरीश रावत ने सैनिक कल्याण विभाग को फरवरी के पहले सप्ताह में कद्दावर फौजियों को चाय पर बुलाने का निर्णय लिया है। इसे वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़ कर देखा जा रहा है। सीएम से रूबरू होने का पूर्वसैनिकों को फायदा मिल सकता है। फौजियों की कई मांगों पर अब तक सरकार के स्तर से सुनवाई नहीं हुई है।
उल्लेखनीय सेवाओं से सम्मानित अलंकृत सैनिकों को दी जाने वाली सम्मान राशि में बढ़ोतरी, वीर नारियों की पुत्री विवाह के लिए स्वीकृत धनराशि में वृद्धि, हाउस टैक्स में माफी जैसे कई मुद्दे हैं जिनका समाधान होना शेष है। अर्द्धसैनिक सर्वाधिक नाराज हैं, जिनके लिए सरकार के अलग निदेशालय की घोषणा अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।
चार जनपद है सबसे अहम
सैनिक की मतसंख्या को लेकर चार जनपद पौड़ी, टिहरी, देहरादून और अल्मोड़ा सबसे अहम हैं। पौड़ी में कार्यरत और पूर्व सैनिक 95 हजार हैं।
टिहरी में यह संख्या 60 हजार है जबकि अल्मोड़ा जनपद में पचास हजार से अधिक फौजियों के मत हैं। अब तक भाजपा के पक्ष में पोस्टल बैलेट अधिक रहे हैं, ऐसे में पूर्व सैनिकों को अपने साथ जोड़ने के लिए कांग्रेस रणनीति बना रही है।