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विपक्ष के सामने उत्तराखंड सरकार 'लाचार'

Sat, 08 Feb 2014 10:29 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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भाजपा विधायकों के दिन भरे चले ड्रामे का अंत आधी रात के बाद हुआ। विधानसभा के भीतर धरने पर बैठे विधायकों को मनाने मुख्यमंत्री रात 12 बजे पहुंचे। करीब एक घंटे की बातचीत हुई।
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मुख्यमंत्री की ओर से न्यायोचित कदम उठाए जाने के आश्वासन के बाद रात लगभग एक बजे भाजपा विधायकों ने धरना और आमरण अनशन दोनों समाप्त कर दिया।

रुद्रपुर दंगे के आरोपी विधायक राजकुमार ठुकराल पर चल रहे मामले को वापस लेने की मांग करते हुए भाजपा के सदस्यों ने बजट सत्र के दूसरे दिन भी सदन में हंगामा किया। इसके बाद भाजपा विधायक सदन के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। विधायक अरविंद पांडेय ने आमरण अनशन शुरू कर दिया।

भाजपा विधायकों ने असंतोष जताया

दिन में वार्ता विफल होने के बाद देर रात मुख्यमंत्री हरीश रावत विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और संसदीय कार्य मंत्री इंदिरा हृदयेश के साथ भाजपा विधायकों को मनाने विधानसभा पहुंचे। मुख्यमंत्री के आश्वासन देने के बाद भाजपा विधायकों ने धरना, अनशन खत्म कर दिया।

विधायक पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले का परीक्षण कराएंगे। सूत्रों के अनुसार इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मुख्यमंत्री से जब अकेले में बात की तो कुछ भाजपा विधायकों ने असंतोष भी जताया।

हम पर विश्वास करे, मैंने तो दोस्ती की बात की है

इससे पहले दिन में सीएम हरीश रावत ने कहा था भाजपा विधायक हठधर्मिता कर रहे हैं। मामला न्यायालय के समक्ष है और मेरे सीएम बनने से काफी पहले का है। केस में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और न्यायालय की प्रॉपर्टी है। अगर भाजपा के पास कोई समाधान है तो सुझाए, हम पर विश्वास करे, मैंने तो दोस्ती की बात की है।

वहीं, धरने पर बैठे नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने दिन में कहा कि सवाल दोस्ती का नहीं, न्याय का है। सीएम मानते हैं कि मुकदमा फर्जी है तो सरकार को मुकदमा वापस लेने का अधिकार है। सीएम ने कहा कि विश्वास की डोर नहीं टूटनी चाहिए, लेकिन उन्होंने गलत बयानबाजी कर इसे तार-तार कर दिया, इससे सदन की अवमानना हुई है।

सदन की मर्यादा का उल्लंघन

भाजपा इस मामले में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगी, अब कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि देर रात इस मुद्दे पर सीएम से वार्ता हुई तो उन्होंने सुबह तक रास्ता निकालने की बात कही। जब सुबह तक कोई जवाब नहीं आया तो मजबूरन हमें धरने पर बैठना पड़ा।

वहीं, पूर्व सीएम निशंक का कहना है कि सदन की मर्यादा का उल्लंघन हुआ है। पहले क्रूर सरकार ने विधायक को जबरन फंसाया और अब न्याय की बात कह सीएम मुकर रहे हैं। धरने पर बैठने वालों में पुष्कर सिंह धामी, स्वामी यतीश्वरानंद, संजय गुप्ता आदि शामिल थे।

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सरकार के तर्क से विपक्ष सहमत नहीं

मुख्यमंत्री के आश्वासन पर देर रात भाजपा विधायकों का धरना भले ही खत्म हो गया। लेकिन दिन में विपक्ष विधायक राजकुमार ठुकराल पर दर्ज मुकदमा वापस लेने के मुद्दे पर सरकार की किसी दलील से सहमत नहीं दिखा।

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के साथ नेता सदन हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट के बीच वार्ता हुई, लेकिन मुकदमा वापसी पर कोई सहमति नहीं बन पाई। विपक्ष ने सरकार के सदन में मुकदमा वापसी के आश्वासन के बावजूद फैसला नहीं लेने को विशेषाधिकार हनन करार देने की बात अध्यक्ष के समक्ष रखी।

मुख्यमंत्री रावत ने मामले में कानूनी और तकनीकी दिक्कतों के चलते अपनी असमर्थता जताई। सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रकरण को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। लगभग 15 मिनट तक चली इस वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद विपक्ष ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने का फैसला लिया, जो आधी रात के बाद तक चला।

विपक्ष के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं है। बातचीत चल रही है। हमने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष स्थिति रख दी है। - सीएम हरीश रावत, नेता सदन

नेता सदन का विश्वास किया लेकिन वह आज सदन में पहुंचे ही नहीं, जो पूरी तरह से विशेषाधिकार हनन का मामला है। विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष यह बात रखी है। सरकार के पास मुकदमा वापस लेने या दोबारा जांच का अधिकार है।
- अजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष

संसदीय प्रणाली के तहत पक्ष और विपक्ष में बात चल रही है। जहां तक पीठ का सवाल है उसे सदन में रखा जाएगा। यह एक न्यायिक मामला है, जिस पर सरकार अधिकारियों से राय ले रही है।
- गोविंद सिंह कुंजवाल,  विधानसभा अध्यक्ष
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