केस 1- हॉस्पिटल अटेंडेंट के पद पर एक आउटसोर्स कर्मचारी ने बताया कि टीडीएस मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से उनकी नियुक्ति हुई थी। कंपनी ने सिक्योरिटी फीस के नाम पर उनसे 40 हजार रुपये लिए थे लेकिन रसीद नहीं दी। उन्होंने बताया कि पूर्व में अटेंडेंट के पद पर तैनात कई कर्मचारियों को निकाला गया लेकिन उनकी सिक्योरिटी फीस वापस नहीं की गई। कर्मचारी ने बताया कि उनको 9 हजार 800 रुपये वेतन दिया जाता है। कभी ड्रेस के नाम तो कभी अन्य खर्चों के नाम पर वेतन 500 से 700 रुपये काट लिए जाते है। वेतन भी समय से नहीं मिलता है। अगर विरोध करेंगे तो कंपनी बाहर कर देगी।
केस 2- सिक्योरिटी गार्ड के पद पर तैनात एक आउटसोर्स कर्मचारी ने बताया कि वह करीब दो वर्ष से एम्स में कार्य कर रहा है। प्रिंसिपल सिक्योरिटी एंड एलाइड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से उनकी नियुक्ति हुई थी। कंपनी ने नियुक्ति के लिए 50 हजार रुपये सिक्योरिटी फीस के तौर पर लिए थे। आज तक जिस भी कर्मचारी को बाहर किया गया तो उसको सिक्योरिटी फीस वापस नहीं दी गई। सिक्योरिटी फीस से नाम पर कर्मचारियों को ठगा जा रहा है। 12 हजार 500 रुपये वेतन निर्धारित है। लेकिन मिलते 11 हजार 900 रुपये ही हैं। मजबूरी में कर्मचारी विरोध नहीं कर पाते है।
केस 3- एम्स से निष्कासित एक आउटसोर्स कर्मचारी ने बताया कि टीडीएस मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से उनकी नियुक्ति हुई थी। कंपनी ने सिक्योरिटी फीस के तौर पर 30 हजार रुपये लिए थे। एक दिन कंपनी ने नोटिस जारी कर कुछ समय बाद नौकरी से निकाल दिया। जब सिक्योरिटी फीस मांगी तो कंपनी ने पैसे देने से साफ इंकार कर दिया। कंपनी ने सिक्योरिटी फीस की रसीद नहीं देती है, ऐसे में बिना साक्ष्य किसके पास गुहार लगाएं।
केस 4- एम्स में ऑफिस अटेंडेंट के पद पर तैनात आउटसोर्स कर्मचारी ने बताया कि टीडीएस मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने 40 हजार रुपये की सिक्योरिटी फीस लेकर उसको नियुक्ति दी थी। इसकी कोई रसीद भी कंपनी प्रबंधन ने नहीं दी। कई कर्मचारियों को हर साल बाहर कर दिया जाता है। उनको सिक्योरिटी फीस भी वापस नहीं दी जाती है। जब कर्मचारी सिक्योरिटी फीस वापस मांगते है तो उनको बताया जाता है कि छह महीने के भीतर काम छोड़ने पर ही फीस लौटाई जाती है। 9 हजार 700 रुपये वेतन निर्धारित है, इसमें भी कई बार बिना जानकारी दिए कटौती कर दी जाती है। विरोध करने पर नौकरी से निकाले जाने का डर रहता है।
एम्स ऋषिकेश प्रशासन ने अभ्यर्थियों से पहले ही कई बार किसी भी एजेंसी या व्यक्ति को नियुक्ति के नाम पैसे न देने की अपील की है। अगर कोई एजेंसी या व्यक्ति पैसा मांगता है तत्काल इसकी लिखित शिकायत एम्स प्रशासन को दी जाए। निश्चित तौर पर संबंधित खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- हरीश मोहन थपलियाल, पीआरओ, एम्स ऋषिकेश