समर्थकों में खुशी की लहर
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद त्रिवेंद्र समर्थकों में खुशी की लहर है। उन्होंने कहा कि यह पूर्व सीएम की एक बड़ी जीत है। उन्होंने पूरी ईमानदारी, कर्मठता के साथ प्रदेश की सेवा निस्वार्थ भाव से की। उनके खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप तत्कालीन सरकार को अस्थिर करने की साजिश भी थे। अदालत का यह फैसला साजिशकर्ताओं के खिलाफ एक बड़ा निर्णय है। इससे ईमानदार और साहसिक नेताओं को हौसला मिलेगा, जिनके खिलाफ भ्रष्चाचार और षडयंत्रकारी कोई भी आरोप लगाकर उन्हें कानूनी उलझन में फंसाने की कोशिश करते हैं।
यह था मामला
हाईकोर्ट का फैसला पत्रकारों द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर आया था, जिनमें जुलाई 2020 में उनके खिलाफ आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी। शर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर रावत पर आरोप लगाने के बाद जालसाजी और धोखाधड़ी सहित आईपीसी के विभिन्न प्रावधान के तहत मामला दर्ज किया गया था। शर्मा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने 2016 में गौ सेवा आयोग के प्रमुख के रूप में उस राज्य में एक व्यक्ति की नियुक्ति का समर्थन करने के लिए अपने रिश्तेदारों के खातों में कथित रूप से धन हस्तांतरण किया था। रावत 2017 से 2021 के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे थे।