उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग अब लोगों के घरों तक पहुंच रही है।
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लैंसडौन के जंगलों में लगी आग मंगलवार को बेकाबू हो गई और डेरियाखाल क्षेत्र के रिहायशी इलाके में पहुंचकर तीन मकानों को अपनी चपेट में ले लिया।
आग से नरेंद्र रावत और सुरेंद्र रावत के मकान स्वाह हो गए। जबकि इनसे सटे मकान पर लगी आग पर काबू पा लिया गया। आग जब बेकाबू हो गई तो सेना के जवानों को बुलाया गया। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
बड़कोट क्षेत्र में तीन दिनों से लगी आग अपर यमुना वन प्रभाग के डीएफओ कार्यालय तक पहुंच गई है। यहां देवदार का घना जंगल आग की चपेट में है।
बावजूद वन विभाग की ओर से आग पर काबू पाने के कोई प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। श्रीनगर और माणिकनाथ रेंज के कई स्थानों पर जंगल धधक रहे हैं। श्रीनगर रेंज में रेवड़ी के जंगल दो दिनों से आग से धधक रहे हैं।
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वनों की आग से शहर का तापमान 39.3 डिग्री मापा गया। बदरीनाथ और केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग सहित जिले की अन्य ब्रांच सड़कों पर कई स्थानों में अधजले पेड़ दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं।
बीती रात को तहसील के निकट और घनसाली बाजार के जंगल में आग भड़क उठी। बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
जब तक उपकरण मिलेंगे आग बुझ चुकी होगी
उत्तराखंड के धधकते जंगल एक बार फिर भगवान भरोसे हैं। इस साल जंगलों में आग लगने की 264 घटनाएं सामने आई हैं।
सतर्कता के दावों के बावजूद वन विभाग ने आग बुझाने के उपकरणों का ई टेंडर मई माह के अंत में किया। अब जब तक ये उपकरण मिलेंगे तब तक मानसून के चलते आग बुझ चुकी होगी।
पहाड़ भी तपे, यहां भी सुकून नहीं मैदान की गर्मी से पस्त सैलानी पहाड़ों की हरी-भरी वादियों में सुकून की तलाश में आते हैं, लेकिन इस बार हालात जुदा हैं।
उत्तराखंड में पारा मैदानी इलाकों को मात दे रहा है। पहाड़ों की रानी मसूरी तक जल रही है। इसी सप्ताह पारा 37 को छू चुका है। यही हाल मुक्तेश्वर और जोशीमठ का है।
सेब के दो हजार पेड़ जले
त्यूनी में जंगल की आग अब बागवानी को भी नुकसान पहुंचाने लगी है। मंगलवार दोपहर अटाल के पास जंगलों में भड़की आग ने हाली, डोखरी और सिलाड़ी गांव में सेब के बागानों का रुख कर लिया।
देखते ही देखते सेब के करीब दो हजार पेड़ खाक हो गए। प्रभावित बागवानों ने तहसील प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई है।
दोपहर करीब 12.30 बजे अटाल के जंगल में आग भड़क गई। करीब दो घंटे बाद आग की लपटें बागानों तक पहुंच गई। धुआं उठता देख बागान स्वामी मौके की ओर दौड़ पडे़, लेकिन तेजी से भड़की आग के आगे उनकी एक न चली।
प्रभावित बागवान गुमान सिंह, कान चंद बलवीर सिंह, कलीराम, भूप सिंह, बालम सिंह, केसर सिंह, ओमप्रकाश, रोशनलाल, माधोराम शर्मा आदि ने तहसील प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
एसडीएम एके पांडेय ने कहा राजस्व उपनिरीक्षक से क्षति की रिपोर्ट मांगी गई है।
डीएफओ दफ्तर तक पहुंची आग
उत्तरकाशी जिले के जंगल धू-धूकर जल रहे हैं। एक सप्ताह से धधक रहे जंगलों में अब तक लाखों की वन संपदा स्वाह हो चुकी है।
बड़कोट क्षेत्र में तीन दिनों से लगी आग अपर यमुना वन प्रभाग के डीएफओ कार्यालय तक पहुंच गई है। यहां देवदार का घना जंगल आग की चपेट में है। बावजूद वन विभाग की ओर से आग पर काबू पाने के कोई प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं।
उत्तरकाशी वन प्रभाग के मुखेम, डुंडा, बाडाहाट तथा धरासू रेंज के जंगलों में फैली आग बढ़ती जा रही है। अपर यमुना वन प्रभाग के पौंटी, सुनाल्डी गांव के जंगल भी आग की चपेट में हैं।
यहां तीन दिन पहले साड़ा गांव के पास लगी आग चक्रगांव, उपराड़ी, छटांगा होते हुए डीएफओ कार्यालय तक पहुंच गई है। कार्यालय के समीप देवदार का जंगल आग की चपेट में है। जंगलों की आग से जलते पेड़ और पहाड़ी से पत्थर सड़कों पर गिरने से यहां यातायात खासा जोखिम भरा हो गया है। मंगलवार को उत्तरकाशी-लंबगांव मोटर मार्ग पर कुटेटी देवी मंदिर के पास एक पेड़ सड़क पर गिरने से यहां यातायात अवरुद्ध हो गया था।
चार दिन से चकराता वन प्रभाग के रिखनाड़ रेंज का जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। अब तक आग की चपेट में आकर करीब 100 हेक्टेयर घना जंगल खाक हो गया है।
मंगलवार दोपहर अटाल के पास जंगलों में भड़की आग ने हाली, डोखरी और सिलाड़ी गांव में सेब के दो हजार पेड़ों को राख कर दिया।
चमोली के देवाल से करीब 12 किमी दूर फैती पलबरा के जंगल में लगी आग को बुझाने की कोशिश में 17 वर्षीय युवक की बुरी तरह झुलस जाने से मौत हो गई।
प्राप्त विवरण के मुताबिक ग्राम पलबरा निवाली दलीपराम का पुत्र विपिन कुमार मंगलवार शाम को ग्रामीणों के साथ जंगल की आग बुझाने गया था। इसी दौरान वह आग की चपेट में आ गया।
निवर्तमान ग्राम प्रधान रामचंद्र ने हादसे की सूचना एसडीएम को दी। एसडीएम ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि वन और राजस्व विभाग की टीम मौके पर रवाना कर दी गई है।
धुंध से हिमाच्छादित चोटियां पर पड़ा पर्दा गोपेश्वर में छायी गहरी धुंध के कारण तीर्थयात्री प्रकृति का आनंद नहीं उठा पा रहे हैं जबकि बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के नंदप्रयाग, लंगासू, भकुंडा और पीपलकोटी से ही हिमालय की उच्च हिमाच्छादित चोटियां दिखनी शुरू हो जाती थीं।
जंगलों में लगी आग से घाटियों में गहरी धुंध छायी हुई है जिससे हिमालय की चोटियां भी धुंध से दिखाई नहीं दे रही हैं।