जीत सिंह नेगी वैसे पूरी तरह से स्वस्थ थे। उन्हें बस दिखना कम हो गया था और इस वजह से वे दुखी भी रहते थे। यह कहना है जीत सिंह नेगी के बेटे ललित सिंह नेगी का। ललित सिंह नेगी के मुताबिक पिता जीत सिंह नेगी दो साल पहले तक सामाजिक रूप से भी खासे सक्रिय थे।
मेरी प्यारी बोई, 2004 में मेरी ओर से निर्देशित फिल्म के सारे गीत जीत सिंह नेगी ने ही लिखे थे। उनके नाटक भारी भूल में पहली बार लड़की का रोल भी लड़की ने किया था। मेरे पिता मनोहर धस्माना ने उस नाटक में नायक की भूमिका अदा की थी। वे फूहड़पन के विरोधी लेकिन आधुनिकता के पक्षधर थे। उनकी कमी अब हमेशा खलेगी।
- मुकेश धस्माना, गढ़वाली फिल्म निर्देशक
गढ़वाली गीतों के पुरोधा जीत सिंह नेगी को माधो की कूल, रामी बौराणी सहित अन्य कई नाटकों के लिए भी जाना जाता है। उनका जाना हतप्रभ कर गया।
-सूर्यकांत धस्माना, कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष
गढ़वाल के गीतों का पुरोधा नहीं रहा। जीत सिंह नेगी के निधन से रिक्त हुए स्थान की पूर्ति नहीं हो सकती। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
-किशोर उपाध्याय, पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष