साधु महात्माओं ने सहमति जताई है कि सरकार उस समय जो भी निर्णय लेगी, वह अखाड़ा परिषद को मान्य होगा। मुख्यमंत्री ने सहयोग के लिए अखाड़ा परिषद का आभार जताते हुए कहा कि परंपराओं का ध्यान रखते हुए अगले वर्ष कुंभ मेले का आयोजन समय पर ही होगा।
फरवरी में उस समय की परिस्थितियों के अनुरूप संत महात्माओं के मार्ग दर्शन से मेले का स्वरूप तय किया जाएगा। वहीं, उन्होंने कहा कि स्थायी प्रकृति के निर्माण कार्य चलते रहेंगे। बता दें कि कुछ साधु-संतों की ओर से यह मांग की जा रही थी कि कोरोना को देखते हुए महाकुंभ एक साल के लिए टाल दिया जाए।