प्रदेश की त्रिवेंद्र रावत सरकार शराब की तस्करी रोकने के लिए आबकारी अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिनियम के नियमों को शराब की तस्करी रोकने के लिए अपर्याप्त माना है।
उन्होंने अधिकारियों से जुर्माने की राशि और सजा बढ़ाने का मसौदा तैयार करने को कहा है, ताकि आबकारी एक्ट को और कड़ा बनाया जा सके। वैसे तो अभी पांच हजार रुपये और दो साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन अधिकांश तस्कर जुर्माने और टीआरसी (न्यायालय के उठने तक) की सजा पर रिहा हो जाते हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुलिस अधिकारियों से पहली बैठक में शराब की तस्करी पर गहरी चिंता जताई। उनका कहना था कि पुलिस शराब तस्करों को पकड़ती है और कुछ घंटों बाद ही उनकी रिहाई हो जाती है। ऐसे में तस्करी पर कैसे लगाम कसी जा सकती है, यह बड़ा सवाल है। पुलिस महानिदेशक एमए गणपति का कहना था कि आबकारी अधिनियम में सजा का प्रावधान कम है। आरोपी जुर्माना कराकर आसानी से जमानत पा जाते हैं। उन्हाेंने सजा और जुर्माना राशि बढ़ाए जाने की वकालत की।
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आबकारी अधिनियम में संशोधन का मसौदा तैयार करने को कहा, ताकि अधिनियम में कड़े प्रावधान किए जा सके। पुलिस महानिदेशक एमए गणपति ने संशोधन के प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू होने की पुष्टि की है। बता दें कि प्रदेश में हरियाणा और पंजाब से होने वाली शराब की तस्करी किसी चुनौती से कम नहीं है। इस साल के ढाई माह में आबकारी अधिनियम के 1013 मुकदमे दर्ज हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 583 थी। 2016 में 3017, 2015 में 2515 और 2014 में 2148 मुकदमे दर्ज हुए।