dehradun woman dead body not come from denmark
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दून की एक महिला का शव पिछले 17 दिन से विदेश से भारत नहीं पहुंच पाया है। डेनमार्क ने शव को भारत भेजा, लेकिन तुर्की ने शव को इस्तांबुल में रोक दिया। महिला के परिजन शव स्वदेश लाने के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। फिर भी शव यहां नहीं पहुंच पा रहा है। शव के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार को लेकर परिजन बेहद चिंतित हैं।
चंद्रबनी निवासी गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट के केंद्रीय अध्यक्ष सूर्य विक्रम शाही की पत्नी रीता (49) डेनमार्क में सेवानिवृत्त नर्स थीं। बेटा सुशांत शाही यूके में रहता है। सुशांत ने बताया कि चार मार्च को उन्हें फोन आया कि उनकी मां रीता गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। पांच मार्च को सुशांत यूके से डेनमार्क पहुंचे। छह मार्च को रीता की मौत हो गईं। पुलिस ने मामला संदिग्ध बताते हुए शव का पोस्टमार्टम किया।
हार्ट अटैक और ब्रेन हैमरेज से मौत होना बताया गया। उसके बाद शव को भारत लाने में दिक्कत शुरू हुई। शव को भारत भेजने के लिए डेथ सर्टिफिकेट बनाने और अन्य जरूरी औपचारिकताओं में करीब आठ दिन लग गए। बेटे सुशांत ने मदद के लिए भारतीय दूतावास में भी संपर्क किया। 15 मार्च को डेनमार्क में अधिकारियों ने सुशांत को बताया कि उनकी मां के शव को फ्लाइट से भारत भेजने की व्यवस्था हो गई है।
सुशांत उसी दिन डेनमार्क से रवाना होकर अगले रोज दिल्ली पहुंच गया। 17 मार्च को दिल्ली एयरपोर्ट गया तो शव के न पहुंचने की जानकारी मिली। पता लगा कि प्लेन तुर्की के इस्तांबुल में लैंड हुआ था। तुर्की के अधिकारियों ने दस्तावेज पूरे न होने की बात कर शव को वहीं रोक दिया है। सुशांत ने बताया कि तुर्की के अधिकारियों ने डेथ सर्टिफिकेट डैनिश लैंग्वेज के बजाय इंग्लिश में और मां के पासपोर्ट की मूल प्रति आदि जरूरी दस्तावेज लाने को कहा है।
सुशांत लगातार भारतीय दूतावास, डेनमार्क और तुर्की के अधिकारियों के संपर्क में हैं। इसके बावजूद शव को भारत पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। सुशांत ने बताया कि मम्मी की ख्वाहिश थी कि उनका अंतिम संस्कार भारत में ही किया जाए। सूर्य विक्रम शाही ने बताया कि वे पत्नी का अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज से भारत में करना चाहते हैं। अन्य परिजन भी रीता के अंतिम दर्शन करने के लिए बेहद परेशान हैं।