कहा जा रहा है कि भाजपा में रहकर आर्य शायद ही कभी मुख्यमंत्री बन पाते। कांग्रेस में दलित चेहरे के तौर पर वह एक मजबूत विकल्प हो सकते हैं। पिछले दिनों कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार हरीश रावत ने भी बयान दिया था कि वह उत्तराखंड में शिल्पकार के बेटे को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। आर्य की घरवापसी को अब रावत के उस बयान से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
नड्डा के सामने संकेत दे चुके थे आर्य
भाजपा में अपनी नाराजगी के संकेत यशपाल आर्य राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने दे चुके थे। पार्टी की कोर ग्रुप बैठक में आर्य ने कहा था कि साढ़े चार बाद भी उन्हें बाहरी पुकारा जा रहा है। इस पर नड्डा ने पार्टी नेतृत्व को इस बारे में ताकीद किया था। अपने मंत्रालयों में दखल को लेकर भी आर्य की लंबे समय से नाराजगी रही।
उनकी इस नाराजगी को कांग्रेस ने भांप लिया और पार्टी के नेताओं ने आर्य की घरवापसी का मार्ग तैयार करना शुरू कर दिया। जब तक भाजपा को इसकी खबर लगती, काफी देर हो चुकी थी। पार्टी ने मुख्यमंत्री को आर्य के घर पर भेजकर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन बात काफी आगे बढ़ चुकी थी।