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Uttarakhand Election 2022: प्रचंड बहुमत की भाजपा सरकार का घोषणापत्र 85 प्रतिशत में पास, लेकिन लोकायुक्त में फेल

Wed, 08 Dec 2021 10:49 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून

सार

Uttarakhand Election 2022: पूरे पांच साल भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नारा बुलंद करने वाली प्रदेश सरकार लोकायुक्त बनाने के इम्तिहान में फिलहाल फेल है। पार्टी के रिपोर्ट कार्ड पर लोकायुक्त बनाने की विफलता का यह धब्बा पूरे चुनाव में कांग्रेस के लिए प्रचार का बड़ा हथियार बनने जा रहा है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र की कसौटी पर परखने के बाद यह तथ्य सामने आया कि अभी तक 85 प्रतिशत घोषणाएं पूरी हुई हैं। सरकार के मंत्रियों से लेकर पार्टी के पदाधिकारी तक इसे शानदार उपलब्धि के तौर पर पेश कर रहे हैं। लेकिन अब कई घोषणाएं हैं, जो अधूरी हैं। इन्हें पूरा करने के लिए सरकार के पास बहुत ज्यादा समय नहीं बचा है।

प्रदेश सरकार लोकायुक्त बनाने के इम्तिहान में फिलहाल फेल

पूरे पांच साल भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नारा बुलंद करने वाली प्रदेश सरकार लोकायुक्त बनाने के इम्तिहान में फिलहाल फेल है। पार्टी के रिपोर्ट कार्ड पर लोकायुक्त बनाने की विफलता का यह धब्बा पूरे चुनाव में कांग्रेस के लिए प्रचार का बड़ा हथियार बनने जा रहा है। 2022 का चुनावी समर अब करीब आ चुका है। इसलिए सत्तारूढ़ भाजपा समेत सभी राजनीतिक दल अपनी सेनाओं के साथ मैदान में उतर चुके हैं।
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राज्य के 78 लाख से अधिक मतदाताओं को रिझाने-लुभाने के लिए लोकलुभावन भाषणों के साथ अब सियासी दल आगामी पंचवर्षीय विकास योजनाओं का रोड मैप तैयार करने में जुट गए हैं। भाजपा ने जनता के सुझावों से अपनी घोषणा पत्र तैयार करने का निर्णय लिया है, इसलिए वह 70 विधानसभाओं में रथों को भेजकर लोगों से पूछेगी कि अगले पांच वर्ष में वह राज्य का कैसा विकास चाहते हैं?   

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मैदान में उतरने से पहले भाजपा से ऐसी आशा थी कि 2017 में जब वह घोषणा पत्र के तौर पर दृष्टि पत्र लेकर आई थी, उसमें किए गए वादे कितने पूरे हुए और अभी कितने अधूरे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का दावा है कि पार्टी की सरकार ने 85 फीसदी से अधिक वादे पूरे कर दिए और बाकी पर तेजी से काम चल रहा है। उनके इस दावे से इतर जब भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र की पड़ताल करते हैं तो यह बात कुछ हद तक सही है कि दृष्टि पत्र में किए गए कई वादों को प्रदेश की सरकार जमीन पर उतारने में कामयाब रही है। लेकिन एक चुनावी वादे के कारण उसे पूरे चुनाव में असहज होना पड़ सकता है।

2017 में भाजपा ने सत्ता की कमान त्रिवेंद्र रावत के हाथों में दी। मुख्यमंत्री की जुबान पर सबसे पहला वाक्य भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का था। तब यह माना गया कि भाजपा सरकार जल्द ही उत्तराखंड को लोकायुक्त दे देगी। पार्टी ने अपने चुनाव दृष्टि पत्र के पेज संख्या 10 पर लोकायुक्त कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए 100 दिन के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति का वादा किया। पार्टी विधानसभा में लोकायुक्त विधेयक भी लाई। लेकिन विधेयक सत्ता पक्ष के विधायकों की आपत्ति के बाद प्रवर समिति को भेज दिया गया। तब से विधेयक प्रवर समिति के पास पड़ा है।

इस अवधि तमाम अवसरों पर तत्कालीन मुख्यमंत्री से लोकायुक्त बिल पर सवाल उठे, जिनका एक ही जवाब आया कि प्रदेश में चल रही सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है, इसलिए लोकायुक्त की आवश्यकता नहीं है। सरकार के इस प्रतिक्रिया से यही संदेश गया कि भाजपा ने तय कर लिया है कि वह अपने घोषणा पत्र में लोकायुक्त बनाने का वादा पूरा नहीं करेगी।
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दृष्टि पत्र की कुछ प्रमुख घोषणाएं जो अभी अधूरी

1. गरीब मेधावी छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क लैपटॉप या स्मार्ट फोन बांटे जाएंगे। मुख्यमंत्री इस योजना की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन अभी मामला टेंडर प्रक्रिया में है।
2. प्रत्येक जिले में छात्राओं के लिए आवासीय विद्यालय खुलेंगे। कुछ जिलों में आवासीय विद्यालय खोलने की अभी घोषणा हुई है।
3.सभी विश्वविद्यालयों में मुफ्त वाई-फाई की सुविधा। कई विश्वविद्यालयों के छात्रों को यह सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है।
4.गढ़वाल और कुमाऊं में ट्रामा सेंटर खुलेगा। इस घोषणा पर प्रभावी ढंग से अमल नहीं हो पाया। पहले से स्थापित ट्रामा सेंटरों की भी हालत खराब है। कुमाऊं में ट्रामा सेंटर मेडिकल कॉलेज में खुला है, लेकिन जानकारों मानना है कि ये मानकों के अनुरूप नहीं है। 
5.पर्यटन गाइड के लिए प्रशिक्षण केंद्र खुलेगा। यह घोषणा भी अभी अधूरी है। इससे पीछे पर्यटन गाइड के प्रशिक्षण के जरिये स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का उद्देश्य था।
6. 2019 तक सभी गांवों को सड़कों से जोड़ा जाएगा। प्रदेश के सभी गांवों को अभी तक सड़कों से नहीं जोड़ा जा सका है। अभी भी उत्तराखंड में गांवों की संख्या जो सड़कों से नहीं जुड़ सके हैं।
7. प्रदेश की नई युवा नीति बनाई जाएगी। 2011 में प्रदेश की युवा नीति बनाई गई थी। भाजपा ने 2017 के दृष्टि पत्र में नई युवा नीति बनाने की घोषणा की। 
8.खाली और पदोन्नति के पदों को छह माह में भरेंगे। भाजपा ने चुनाव घोषणा पत्र में कर्मचारियों के हित में यह घोषणा की थी कि छह महीने के अंदर पदोन्नति के सभी पद भरे जाएंगे और खाली पदों को भरा जाएगा। लेकिन चुनावी साल में राज्य सरकार ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए

ये घोषणाएं भी हैं

9. महिलाओं को स्ववरोजगार के लिए 20 करोड़ निधि का सामाजिक सुरक्षा कोष।
10. महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम को फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित होंगे।
11. एससी व एसटी के बैक लॉग के पदों को प्राथमिकता से भरा जाएगा।
12. व्यापारियों के हित में व्यापार कल्याण बोर्ड बनेगा।
13. असंगठित क्षेत्र के ठेला गाड़ी, चाल, दुकानों, होटलों में काम करने वाले घरों में काम करने वाले महिला-पुरुष, साइकिल रिक्शा चालक, हॉकर के लिए उत्तराखंड सरकार ने दीन दयाल सुरक्षा बीमा योजना शुरू होगी।
14. आर्थिक अपराधों  के लिए विशेष न्यायालयों का गठन होगा।
15. भ्रष्टाचार रोकने के लिए एंटी करप्शन सेल बनेगा।
16. कर्मचारियों के मसलों के समाधान के लिए शिकायत प्रकोष्ठ बनेगा।  
17. दुर्गम क्षेत्रों में सेवारत शिक्षकों व कर्मचारियों को दुर्गम भत्ता दिया जाएगा। 
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